Connect with us

Business

क्रेडिट कार्ड के बढ़ते कदम, महामारी के बाद खुशहाली का संकेत

Published

on


रघु मोहन /  September 22, 2022






भारत का मध्यम वर्ग धड़ल्ले से खर्च कर रहा है। जुलाई में क्रेडिट कार्ड से अब तक की सर्वाधिक 1.16 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। क्रेडिट कार्ड से खरीदारी की मासिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी और सालाना वृद्धि दर दर 54 फीसदी रही। लगातार पांचवें महीने खरीदारी 1 लाख करोड़ रुपये रही। जुलाई में 15.3 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे।

इससे इन कार्ड की संख्या बढ़कर आठ करोड़ से अधिक हो गई थी। नए क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में एचडीएफसी सबसे आगे रहा। उसने जुलाई में 3,44,364 नए कार्ड जोड़े और इसके कुल कार्डों की संख्या 1.794 करोड़ हो गई। इसके बाद ऐक्सिस बैंक ने 2,27,614 नए कार्ड (99.3 लाख कार्ड) और एसबीआई ने 2,18,933 नए कार्ड (1.45 करोड़ कार्ड) जारी किए।

कार्ड से खरीदारी और नए कार्ड जारी करने की दर बढ़ी है। इसके बढ़ने का कहीं अच्छा पहलू यह भी है कि महामारी के दौरान दो साल से अधिक समय अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने और इसके असर के बाद यह दर बढ़ी है। कार्ड के कारोबार को असुरक्षित में से एक माना जाता है। क्या ऐसे में हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि वेतन कटौती और नौकरी जाने के नुकसान से मुक्त हो गए हैं? अगर ऐसा है तो क्यों?

रिटेल क्षेत्र के वरिष्ठ बैंकर्स ने प्लास्टिक मनी में आई उछाल के लिए तीन कारणों को जिम्मेदार माना है। पहला, ऑनलाइन भुगतान करने में आरामदायक स्तर का पहुंचना। एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, ‘प्रति व्यक्ति रुपये के भुगतान के संबंध में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर भुगतान की मात्रा भले ही कम हो सकती है लेकिन इसने लोगों की सोच को पूरी तरह बदल दिया है।’

अभी यूपीआई के नि:शुल्क मुहैया होने पर चर्चा हो रही है लेकिन इसने असलियत में उपभोक्ताओं को डिजिटल बैंक को आसानी से इस्तेमाल करना सिखा दिया है। इसके अलावा क्रेडिट ब्यूरो डेटा बनाने में भी मदद मिली है। कार्ड जारी करने वाले ने जो भी खर्च किया है, उसका ब्योरा रहता है। उपभोक्ताओं के इस खर्चे की गई राशि में घर, वाहन, सोने से लेकर व्यक्तिगत ऋण तक शामिल हैं। इसके अलावा विश्लेषकों के लिए आंकड़े भी मुहैया हो जाते हैं। एक पहलू यह भी है कि महामारी के दौर में दुकान या स्टोर पर जाकर खर्च करना और छुट्टियां मनाने पर पैसा खर्च करना बिल्कुल खत्म हो गया था और ई-कॉमर्स बहुत तेजी से बढ़ा था।

भारतीय रिजर्व बैंक के वित्तीय वर्ष 22 की पहली तिमाही के भुगतान के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि के दौरान क्रेडिट कार्ड की संख्या 2.02 अरब हो गई और इनसे खर्च हुए धन का मूल्य 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। क्रेडिट कार्ड के पीओएस (पाइंट ऑफ सेल) 30.583 करोड़ हो गए जबकि ई-कॉमर्स में लेन-देन 30.213 करोड़ हुए थे।

क्रेडिट कार्ड से पीओएस के तहत 1040.03 अरब रुपये और ई-कॉमर्स के तहत 1,770 अरब रुपये के लेन-देन हुए थे। वर्ल्ड लाइन इंडिया की पिछली इंडिया डिजिटल पेमेंट रिपार्ट के मुताबिक, ‘क्रेडिट कार्ड के पीओएस और ई कॉमर्स की संख्या तकरीबन बराबर सी है। लेकिन पीओएस की तुलना में ई-कॉमर्स का लेन-देन कहीं अधिक हुआ है। इसी के साथ भुगतान करने का तरीका फिजिकल से डिजिटल की तरफ बढ़ रहा है।’

हालांकि नकद की गुणवत्ता में सुधार आया है। हालांकि यह शुरुआती दौर में है और इस पर अभी यकीन करना मुश्किल है। जून 2022 की वित्तीय ​​सि्थरता रिपोर्ट  (एफएसआर : जून 2022) के मुताबिक सभी श्रेणियों में उपभोक्ता क्रेडिट के भुगतान के स्तर में सुधार हुआ है। सरकारी बैंकों में मार्च में भुगतान नहीं करने का स्तर (डेलिक्वेंसी) एक साल पहले 4.90 फीसदी था जो अब गिरकर 4.45 फीसदी पर आ गया। इसी तरह निजी बैंकों का 1.40 फीसदी (2.01 फीसदी), गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (आवास ऋण कंपनियों सहित) का 2.34 फीसदी और फिनटेक का 2.26 फीसदी (3.3 प्रतिशत) है।

भुगतान करने के स्तर में सुधार से यह भी प्रदर्शित होता है कि कार्डधारकों के आत्मविश्वास में सुधार हुआ है। यह कार्ड जारी करने वालों के साथ-साथ डिजिटल उधारदाताओं, प्री पेड कार्ड जारीकर्ताओं (अर्ध क्रेडिट कार्ड जारी करके नियामक आर्बिटेज का फायदा उठाने वाले)और अभी-खरीदो-बाद में – भुगतान (बॉय-नाउ-पे-लेटर) के लिए भी बेहतरीन रहेगा।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय के तहत द इंडियन ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के मुताबिक 2030 तक ई-कॉमर्स का मार्केट 350 अरब डॉलर का होगा। यह स्तर अभी के मुकाबले दो गुना अधिक है। वित्तीय वर्ष 26 में ई-रिटेल मार्केट 120-140 अरब डॉलर का होगा। यह साल 2020 में 25.7 अरब डॉलर  था। भारतीय रिटेल मार्केट की तुलना की जाए तो यह अभी 810 अरब डॉलर की है। यह 2026 में बढ़कर 14 लाख करोड़ डॉलर और 2030 में 1.8 लाख करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। लिहाजा इन स्टोर और ऑनलाइन भुगतान में तेजी से इजाफा होना तय है। कार्ड कारोबार का दायरा और विस्तृत हो जाएगा।

यह दायरा और बढ़ होता, यदि आरबीआई ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति दी होती। केंद्रीय बैंक ने 18 साल पहले 7 जून, 2004 को परिपत्र जारी किया था। इस परिपत्र के मुताबिक क्रेडिट कार्ड के कारोबार में प्रवेश करने के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का शुद्ध स्वामित्व वाला कोष होना चाहिए।

यह परिपत्र एनबीएफसी को क्रेडिट कार्ड जारी करने पर कोई नियामकीय प्रतिबंध नहीं लगाता। हालांकि बाद में आरबीआई ने कहा था कि वह इसकी समीक्षा करेगा। साल 2004 के परिपत्र को आरबीआई के ‘ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल ऋण पर कार्य समूह की रिपोर्ट’ के साथ देखा जाता है और इस पर बीते साल नवंबर में लोगों से राय मांगी गई थी। इससे इस क्षेत्र में चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया।

बैंकों के अलावा कुछ मोनालाइन इशुअर भी हैं – इनके कारोबार बैंक के कार्ड कारोबार की तरह नहीं हैं और उन्होंने डेटा एनालिटिक्स की बदौलत अपनी किस्मत आजमाई थी। इस क्रम में 1990 के दशक में जीई कैपिटल और कैपिटल वन थी। जीई कैपिटल ने भारतीय स्टेट बैंक से गठजोड़ कर लिया। हालांकि कैपिटल वन के कई प्रयास विफल हुए। उसने केनरा बैंक के साथ संयुक्त उद्यम शुरू किया- इसके बाद भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ प्रयास किया। बाकी सभी इतिहास है।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Business

सितंबर में विनिर्माण गतिविधियों की अच्छी स्थिति बरकारः S&P सर्वे

Published

on

By


 












भाषा / नई दिल्ली 10 03, 2022






भारत में विनिर्माण गतिविधियां सितंबर के महीने में आंशिक रूप से सुस्त पड़ने के बावजूद अच्छी स्थिति में बनी रहीं और कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती की। सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह आकलन पेश किया गया। 

S&P के ‘वैश्विक भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक’ (PMI) के सितंबर आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय विनिर्माण उद्योग की सेहत में तगड़ा सुधार देखा गया है। इस दौरान कंपनियों ने अपना उत्पादन बढ़ाने के साथ ही नए कर्मचारियों की भर्ती भी की। सितंबर में PMI 55.1 पर रहा जो विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। यह लगातार 15वां महीना है जब विनिर्माण में सुधार दर्ज किया गया है। 

हालांकि सितंबर का PMI अगस्त के 56.2 की तुलना में थोड़ा कम रहा। S&P की PMI सर्वेक्षण कहता है कि विनिर्माण विस्तार की दर अगस्त की तुलना में थोड़ा सुस्त पड़ने के बावजूद ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बनी रही। बिक्री में बढ़त और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की। लागत मूल्य में कमी आने से कंपनियों की खरीद में बढ़त का रुख रहा। 

सर्वेक्षण के मुताबिक, “कंपनियों की विनिर्माण खरीद से जुड़ी लागत दो साल में सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ी जबकि उत्पादन भार मुद्रास्फीति सात महीने के निचले स्तर पर आ गई।” 

PMI के 50 से अधिक रहने को विनिर्माण गतिविधियों में सुधार का संकेत माना जाता है जबकि इस सूचकांक के 50 से नीचे रहने को विनिर्माण उद्योग में सुस्ती का इशारा माना जाता है। S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की आर्थिक सह निदेशक पॉलियाना डि लीमा ने कहा, “पीएमआई के नए आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक चुनौतियों और मंदी की आशंका के बावजूद अच्छी स्थिति में बना हुआ है।”

Keyword: pmi, manufacturing, manufacturing activities, corona epidemic, manufacturing PMI,Factory output,inflation,Weak Rupee,RBI,Repo Rate Hike,मैन्‍यूफैक्‍चरिंग पीएमआई, फैक्‍ट्री गतिविध,


























Source link

Continue Reading

Business

Bajaj Auto की कुल बिक्री 2 प्रतिशत घटी, कंपनी को घाटा

Published

on

By


सितंबर माह में Bajaj Auto की कुल बिक्री में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शेयर बाजार को दी गई सूचना के मुताबिक कंपनी की बिक्री पिछले साल के सितंबर के मुकाबले 2 प्रतिशत तक कम हुई  है। सितंबर 2022 में कंपनी ने कुल 3,94,747 यूनिट बेचे जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 4,02,021 यूनिट था।

दोपहिया वाहनों की बिक्री घटी

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि बीते सितंबर माह में कंपनी के दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी गिरावट हुई है। सितंबर में दोपहिया वाहनों की बिक्री पिछले साल के समान अवधि के मुकाबले 4 प्रतिशत तक घटी है। सितंबर 2022 में कंपनी द्वारा कुल 3,48,355 दोपहिया वाहन बेचे गए जबकि पिछले साल 3,61,036 दोपहिया बेचे गए थे। 

Commercial van की बिक्री बढ़ी

हालांकि कंपनी के वाणिज्यिक वाहन (Commercial van) की बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। सितंबर में 13 प्रतिशत अधिक वाणिज्यिक वाहन वाहन बिके। कंपनी द्वारा सितंबर में कुल 46,392 वाणिज्यिक वाहन बेचे गए। पिछले साल सितंबर में 40,985 वाणिज्यिक वाहन बिके थे। कंपनी ने आगे कहा कि बीते सितंबर में वाहन निर्यात में भी कमी आई है। सितंबर में वाहनों का कुल निर्यात 33 प्रतिशत गिरकर 1,40,083 यूनिट पर आ गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 2,09,673 वाहनों का निर्यात किया था।



Source link

Continue Reading

Business

5G के बाद, रिलायंस जियो अब लाएगी 15000 का 4G लैपटॉप

Published

on

By


रिलायंस जियो यह लैपटॉप Qualcomm और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिल कर बना रही है
बीएस वेब टीम / नई दिल्ली October 03, 2022






1 अक्टूबर को देश में 5G सेवाओं की शुरुआत करने के बाद, रिलायंस जियो अब 4G सिम के साथ एक कम बजट वाला सस्ता लैपटॉप भी लॉन्च करने जा रही है। इसकी कीमत 15000 रुपए होगी। इस लैपटॉप का नाम जियोबुक हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इसे तीन महीने के अंदर लॉन्च कर सकती है। 


बता दें, रिलायंस जियो इस लैपटॉप को सस्ते 4जी स्मार्टफोन की तर्ज पर मार्केट में ला रही है। सूत्रों के अनुसार लैपटॉप इस महीने से ही स्कूलों और सरकारी संस्थानों के लिए उपलब्ध कराया जायेगा। रायटर्स के हवाले से कहा गया है कि रिलायंस जियो यह लैपटॉप Qualcomm और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिल कर बना रही है। 


बता दें, Qualcomm कंपनी ARM Ltd की टेक्नोलॉजी से तैयार चिपसेट लैपटॉप के लिए उपलब्ध कराएगी।  वहीं Microsoft लैपटॉप के लिए  Windows OS सपोर्ट देगी।


हालांकि रिलायंस जियो ने इस सस्ता लैपटॉप को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी इसे सबसे पहले एंटरप्राइज ग्राहकों को उपलब्ध करवाना चाहती है। इनमें स्कूल और सरकारी संस्थान को भी शामिल किया जायेगा। बाद में यह लैपटॉप आम लोगों के लिए भी बाजार में उपलब्ध होगा।



Source link

Continue Reading