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किम जोंग ने राजधानी प्योंगयांग में क्यों लगाया सख्त लॉकडाउन? उत्तर कोरिया के लाखों लोग घरों में कैद

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उत्तर कोरिया ने प्योंगयांग में 5 दिनों के लाकडाउन का ऐलान किया है। इस दौरान विदेशी दूतावासों को भी अपने कर्मचारियों को अंदर रखने की हिदायत दी है। प्योंगयांग प्रशासन ने कहा कि देश में फ्लू के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में संक्रमण को कम करने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

 



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तुर्की में अब लाशों का हिसाब रखना हो रहा मुश्किल, मौत का आकंड़ा 2,300 के पार

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Image Source : AP
तुर्की और सीरिया में भयानक भूकंप

तुर्की और सीरिया में आज विनाशकारी भूकंप के ऐसे झटके आए कि लाशों का हिसाब रखना मुश्किल हो रहा है। 100 साल बाद पूरी दुनिया ने ऐसा भयंकर भूकंप देखा है। तुर्की में आज एक के बाद एक तीन जबरदस्त भूकंप आए। भूकंप का पहला जबरदस्त झटका 7.8 की तीव्रता का आया, दूसरा झटका 7.6 का और तीसरा झटका 6.0 तीव्रता का आया। इस भूकंप में अब तक 2300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए। मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

ताश के पत्तों की तरह ढह गईं इमारतें


इस विनाशकारी भूकंप में कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और कई शहर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। हर तरह मौत का मंजर ही नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि सैकड़ों लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं, और मरने वालों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि बचाव दल पूरे क्षेत्र के शहरों और कस्बों में मलबे में फंसे लोगों की खोज कर रहा है। बॉर्डर के दोनों तरफ, अलसुबह आए भयानक भूकंप से डरकर लोग ठंडी, बरसाती और बर्फीली रात में घरों से बाहर निकल आए। इमारतें फर्श पर पड़े ढेर में बदल गईं। 

लेबनान, सीरिया, साइप्रस, इजराइल और फ़िलिस्तीन तक झटके

तुर्की के दक्षिण में सीरियाई सीमा के पास स्थानीय समयानुसार सुबह 4:17 बजे भूकंप का एक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया और पहले झटके के कुछ मिनट बाद दूसरा और फिर तीसरा शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। तुर्की में 7.8, 7.6 और 6.0 तीव्रता के लगातार तीन विनाशकारी भूकंप आए। अभी काफी लोग इमारतों के मलबों में भी फंसे हुए हैं, जिन्हें राहत और बचाव दलों के सदस्य बाहर निकालने की कोशिशों में लगे हुए हैं। ये भूकंप के झटके तुर्की समेत लेबनान, सीरिया, साइप्रस, इजराइल और फ़िलिस्तीन में भी महसूस किए गए हैं

तुर्की में भूकंप से पहले भी मारे गए हैं हजारों लोग

आज तुर्की में 7.8 की तीव्रता वाला भूकंप आया था, इससे पहले 1939 में 7.8 की तीव्रता वाला भूकंप आया था जिसमें 32 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। 1999 में तुर्की के इजमित में भूकंप आया था, जिसमें 17 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। 1784 को एरजिनकान में इसी पैमाने का भूकंप आया था, जिसमें 5 हजार से ज्याद लोग मारे गए थे।

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Earthquake Prediction: भूकंप वाला नास्त्रेदमस! तुर्की में आएगा भूचाल, तीन दिन पहले ही हो गई थी भविष्यवाणी

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Turkey Earthquake Prediction: तुर्की में आए भूकंप ने इसकी भविष्यवाणियों की सटीकता पर बहस छेड़ दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्रैंक नाम के एक शोधकर्ता ने तीन दिन पहले इसकी भविष्यवाणी कर दी थी। हालांकि कई लोग कह रहे हैं कि यह एक तुक्का है, क्योंकि उनकी ही कई भविष्यवाणियां अभी तक गलत साबित हो चुकी हैं।

 



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नेपाल में यति एयरलाइंस क्रैश में मारे गए थे 72 लोग, अब हादसे की वजह आई सामने

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Image Source : PTI
फ्लाइट ATR-72 क्रैश में मारे गए थे 72 लोग

Nepal Plane Crash: नेपाल में हुए प्लेन क्रैश की वजह सामने आ गई है। प्लेन क्रैश की इनवेस्टिगेशन कर रही जांच समिति ने बताया कि यति एयरलाइंस (Yeti Airlines) के ATR-72 विमान का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से प्लेन के क्रैश होने के कारणों का पता लगा है। जांच समिति ने बताया कि 15 जनवरी को पोखरा में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे इंजन में खराबी के संकेत मिले हैं। 

फ्लाइट ATR-72 क्रैश में मारे गए थे 72 लोग

गौरतलब है कि यति एयरलाइन की फ्लाइट नंबर- 691 त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 15 जनवरी को उड़ान भरने के बाद पोखरा में उतरने से कुछ मिनट पहले ही नए और पुराने हवाई अड्डे के बीच बहने वाली सेती नदी में दुघर्टनाग्रस्त हो गई थी। इस क्रैश में एटीआर-72 मॉडल के विमान में सवार सभी 72 लोगों की मौत हो गई थी। मारे गए यात्रियों में 55 नेपाली और पांच भारतीय सहित 15 विदेशी नागरिक और चालक दल के चार सदस्य थे।

क्रैश में 6 यात्रियों की नहीं हो पाई पहचान, डीएनए जांच शुरू
बता दें कि नेपाल के अधिकारियों ने जनवरी में हुई विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले उन छह यात्रियों की डीएनए जांच शुरू की जिनके अवशेषों की अबतक पहचान नहीं हो पाई थी।  त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के फॉरेंसिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ.गोपाल कुमार चौधरी ने बताया, ‘‘पोखरा विमान दुर्घटना में मारे लोगों में से छह की पहचान करने के लिए डीएनए जांच की जरूरत थी क्योंकि उनके शव बुरी तरह जल गए हैं।’’ अधिकारियों ने बताया कि जांच की प्रक्रिया केंद्रीय पुलिस फारेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में शुरू हुई है। सूत्रों ने बताया कि परिवार के नमूने और शवों की हड्डियों और दांतों से डीएनए नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच की प्रक्रिया पूरी होने में दो सप्ताह का समय लगेगा।

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