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कल आज और कल

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टी. एन. नाइनन /  11 18, 2022






एक वक्त था जब संघर्ष से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले सदिच्छा से भरे पर्यवेक्षक कहा करते थे कि देश को लेकर वे अल्पकालिक रूप से निराशावादी नजरिया रखते हैं लेकिन दीर्घाव​धि को लेकर वे आशा​न्वित हैं।

अब इस दृ​ष्टिकोण का अनपे​क्षित विपरीत देखने को मिल सकता है। कई लोग अल्पाव​धि को लेकर आशावादी लेकिन दीर्घाव​धि को लेकर निराशा से ​घिरे हैं। आप कह सकते हैं कि अगर हम अल्पाव​धि की घटनाओं का ध्यान रखें तो दीर्घावधि स्वयं अपना ध्यान रख लेगी। ऐसे में इस दलील पर गौर कीजिए। 

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था है। यह सबसे तेज गति से विकसित होती बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह तेजी ऐसे कठिन समय में हासिल है जब जापान और ब्रिटेन तक की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट आ रही है और पिछली तिमाही तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी इसी दौर से गुजर रही थी।

यूरोप क्षेत्र की हालत भी एकदम सपाट है। भारत में मुद्रास्फीति की दर प​श्चिम की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से कम है। व्यापार के मोर्चे पर भारत का चालू खाते का घाटा अमेरिका और ब्रिटेन से कम है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की बात करें तो वह अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में कम ही गिरा है। पूरा मामला वृद्धि से इतर भी है। आ​र्थिक ​स्थिरता के मोर्चे पर भी भारत का प्रदर्शन अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है।

आमतौर पर भारत का प्रदर्शन चीन की छाया में ढक जाता था लेकिन चीन की गति कमजोर पड़ी है। उसकी वृद्धि के भारत की तुलना में आधा रहने का अनुमान है तथा वह ढांचागत समस्याओं से जूझ रहा है, खासतौर पर वित्तीय क्षेत्र की दिक्कतों से। भारत को अपने अनुभव से पता है कि उसे संकटग्रस्त बैलेंस शीट को सही करने में कितना वक्त लगेगा। इस बीच जापान का मामला एकदम अलग है। कम मुद्रास्फीति और दीर्घाव​​धि के चालू खाता घाटे के अ​धिशेष के बावजूद वहां गतिशीलता का अभाव है। 

कहने की आवश्यकता नहीं कि भारत अन्य देशों की तुलना में विकास के एक अलग स्तर पर है और हमारी प्रतिव्य​क्ति आय काफी कम है। परंतु अगर निकट भविष्य पर नजर डाली जाए तो आ​र्थिक वृद्धि वै​श्विक औसत का दोगुनी हो सकती है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को कम करने पर केंद्रित है हालांकि पूंजीगत आवक तथा विदेशी मुद्रा भंडार चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए पर्याप्त है।

यह उस परिदृश्य से एकदम विपरीत है जहां प​श्चिम की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी की आशंका से जूझ रही हैं। ब्रिटेन में दशकों तक उठाए गए गलत कदमों ने वहां जीवनस्तर को प्रभावित किया है और बहुत कष्टप्रद विकल्प रह गए हैं। यह वह समय है जब चीन की वृद्धि दर वै​श्विक औसत से नीचे जा सकती है और अमेरिका अपनी राजनीति में ही ​घिरा हुआ है।

घरेलू स्तर पर देखें तो सरकार निरंतर नई पहलों में व्यस्त है जिनमें प्रोत्साहनों के प्रतिबद्ध इस्तेमाल के साथ देश को विनिर्माण का केंद्र बनाने की को​शिश और परिवहन तथा दूरसंचार क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में असाधारण निवेश शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन को लेकर एकाग्रता भी इसमें मददगार है: मिसाल के तौर पर यूक्रेन संकट को लेकर कुशल प्रतिक्रिया, जलवायु परिवर्तन से निपटने की को​शिशों में लगातार अपनी बात मजबूत करना और इस सप्ताह आयोजित जी-20 ​शिखर बैठक में प्रभावशाली भूमिका का निर्वाह। इससे अनुमान लगता है कि देश जानता है कि वह क्या कर रहा है जबकि कुछ अमीर देश इस मामले में भ्रमित नजर आते हैं।

तो फिर ऐसा क्यों है कि कई पर्यवेक्षकों के लिए वर्तमान में आशावाद निकट भविष्य तक सीमित क्यों है? इसकी वजहें जानी पहचानी हैं और उनमें भी सबसे महत्त्वपूर्ण है बेरोजगारी की ढांचागत समस्या जिससे निपटना मु​श्किल है और जो सामाजिक अशांति की वजह भी है। ​शिक्षा और स्वास्थ्य की खराब ​स्थिति भी इसी के साथ जुड़ी हुई है और पोषण की कमी तो समस्या है जिसके नतीजे ठिगने और कमजोर बच्चों के रूप में नजर आ रहे हैं।

ध्यान रहे ये बच्चे ​भविष्य के कामगार हैं। इन तमाम कारकों के साथ एक देश अपने उभार की गति न तो बढ़ा सकता है और न ही उसे बरकरार रख सकता है। तीसरी तरह के मुद्दे भी हैं जो व्यवस्थागत निगरानी के सीमित दायरे से संबद्ध हैं। इनका काम प्राथमिक चूकों को रोकना होता है। 

पर्यवेक्षकों की दीर्घकालिक निराशा के लिए जिम्मेदार ऐसे मसलों को सरकार के राजनीतिक और सामाजिक लक्ष्यों से जुड़े लोग खारिज कर देते हैं। इन्हें पूरा भरोसा है कि यह भारत का दशक है क्योंकि चालू तेजी को प्रभावित करने वाले कारक अस्थायी नहीं हैं। यही कारण है कि उन्हें लगता है कि ‘उच्च मध्य आय’ (4,000 डॉलर से अ​धिक की प्रति व्य​क्ति आय जबकि फिलहाल यह 2,400 डॉलर प्रति व्य​क्ति है) पहुंच के दायरे में है। परंतु यह बात भी सही है कि व्यवस्था के नियंत्रण में अलग तरह से बदलाव करना होगा ताकि बेहतर संतुलन कायम किया जा सके और गति को तेज किया जा सके। ऐसा किए बिना व्यवस्थागत दिक्कत बढ़ेगी और तब हमें और अ​धिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 



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भारतीय मुक्केबाज उर्वशी सिंह ने कोलंबो में दो डब्ल्यूबीसी खिताब जीते

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भाषा / नई दिल्ली November 28, 2022






भारतीय मुक्केबाज उर्वशी सिंह ने कोलंबो में 10 राउंड के मुकाबले में थाईलैंड की राष्ट्रीय चैंपियन थानचानोक फानन को हराकर डब्ल्यूबीसी अंतरराष्ट्रीय सुपर बेंथमवेट और डब्ल्यूबीसी एशिया सिल्वर क्रॉउन के खिताब अपने नाम किए।


उर्वशी ने रविवार की रात को हुए मुकाबले में थानचानोक को सर्वसम्मत फैसले से हराया। उर्वशी ने शुरूआती राउंड में रणनीतिक रवैया अपनाया लेकिन चौथे राउंड से वह अपनी प्रतिद्वंदी पर हावी हो गई। थानचानोक ने वापसी की कोशिश की लेकिन उर्वशी अपनी रणनीति, तेजी और करारे मुक्कों से थाईलैंड की खिलाड़ी पर पूरी तरह से हावी रही। 


उर्वशी ने कहा,‘‘ मैं अपनी पूरी प्रमोशन टीम की आभारी हूं जिनके बिना मैं यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सकती थी। मैं अब डब्ल्यूबीसी एशिया महाद्वीपीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियन हूं।’’ इस बीच पूर्व एमेच्योर युवा विश्व चैंपियन सरजू बाला देवी ने थाईलैंड की ख्वांचित खुन्या के चोटिल हो जाने के कारण दूसरे राउंड में बाहर हो जाने से फ्लाईवेट खिताब जीता। 


भारतीय मुक्केबाज अविकास ताराचंद ने श्रीलंका के राष्ट्रीय चैंपियन लासिंदु एरांडा को हराकर लाइटवेट वर्ग का खिताब जीता। भारत के एक अन्य मुक्केबाज और डब्ल्यूबीसी एशियाई महाद्वीपीय चैंपियन सचिन डेकवाल को हालांकि फिलीपींस के मुक्केबाज जूल्स विक्टोरियानो से हार का सामना करना पड़ा।



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सिख संत गुरु तेग बहादुर, समाज सुधारक ज्योतिबा फुले को UP CM योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि दी

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भाषा / नई दिल्ली November 28, 2022






उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सिख संत गुरु तेगबहादुर के बलिदान दिवस और समाज सुधारक महात्मा ज्योति राव गोविंद राव फुले की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘‘महान समाज सुधारक एवं चिंतक, महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।’’ 


उन्होंने लिखा, ‘‘महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने और छुआछूत समेत अनेक कुरीतियों के उन्मूलन में उनके अविस्मरणीय योगदान समाज के लिए सदैव प्रेरणा रहेंगे।’’ 


एक अन्य ट्वीट में गुरु तेग बहादुर को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘महान संत, ‘हिन्द दी चादर’ श्रद्धेय गुरु श्री तेग बहादुर जी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।’’ 


उन्होंने कहा, ‘‘आप अधर्म और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के प्रबल प्रतीक हैं। धर्म, संस्कृति व मानवता की रक्षा को समर्पित आपका संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए एक महान प्रेरणा है।’’ 



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विश्व कप में मोरक्को की जीत के बाद बेल्जियम, नीदरलैंड में दंगे ब्रसेल्स

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भाषा / नई दिल्ली November 28, 2022






फुटबॉल विश्वकप में रविवार को बेल्जियम पर मोरक्को की 2-0 से जीत के बाद बेल्जियम और नीदरलैंड के कई शहरों में दंगे भड़क उठे। ब्रसेल्स में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार छोड़ी और आंसू गैस के गोले दागे। 


पुलिस ने ब्रसेल्स में करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया जबकि उत्तरी शहर एंटवर्प में भी आठ लोगों को पकड़ा गया। ब्रसेल्स पुलिस की प्रवक्ता इल्से वैन डे कीरे ने कहा कि कई दंगाई सड़कों पर उतर आए और कारों, ई-स्कूटरों में आग लगा दी तथा गाड़ियों पर पथराव किया। घटना में एक व्यक्ति के घायल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। 


ब्रसेल्स के महापौर फिलिप क्लोज ने लोगों से शहर के मध्य में जमा नहीं होने का अनुरोध किया और कहा कि अधिकारी सड़कों पर व्यवस्था बहाल करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हालांकि पुलिस के आदेश के बाद ट्रेन और ट्राम यातायात बाधित हुआ है। क्लोज ने कहा, ‘‘ये लोग खेल के प्रशंसक नहीं हैं बल्कि ये दंगाई हैं।’’ 


आंतरिक मंत्री एनेलीज वेरलिंडेन ने कहा, ‘‘यह देखना दुखद है कि किस तरह से मुट्ठी भर लोग स्थिति को खराब कर रहे हैं।’’ 


पड़ोसी देश नीदरलैंड में पुलिस ने कहा कि रॉटरडैम में हिंसा भड़क उठी और दंगा रोधी अधिकारियों ने करीब 500 लोगों के फुटबॉल समर्थक समूह को रोकने का प्रयास किया जिन्होंने पुलिस पर पथराव किया और आगजनी तथा तोड़फोड़ की। घटना में दो पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।


रविवार देर शाम कई शहरों में अशांति की सूचना मिली। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक देश की राजधानी एम्सटर्डम और हेग में अशांति का माहौल है।

 



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