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कतर में फुटबॉल टीमों के ‘बॉडीगार्ड’ बने पाकिस्तानी सैनिक, 4500 जवानों के जिम्मे फीफा वर्ल्डकप की सिक्योरिटी

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दोहा : कतर इस बार फीफा वर्ल्डकप 2022 की मेजबानी कर रहा है। टूर्नामेंट की सिक्योरिटी में उसे पाकिस्तान की मदद मिल रही है। वर्ल्ड कप की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने अपने 4500 सैनिकों को कतर भेजा है। कतर ने कई देशों से सुरक्षा बलों की मदद मांगी थी जिनमें फ्रांस, जॉर्डन, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। फुटबॉल वर्ल्ड कप देखने के लिए अनुमानित 12 लाख फैंस कतर पहुंच सकते हैं जिनकी सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए कतर ने देशों से यह मांग की है। फीफा वर्ल्डकप की शुरुआत 20 नवंबर से हो रही है।

पाकिस्तान अकेला ऐसा देश है जिसने अपने पैदल सैनिकों को दोहा भेजा है। हाल के हफ्तों में 4500 पाकिस्तानी पैदल सैनिक कतर पहुंचे हैं। द टेलीग्राफ से बात करते हुए एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने कहा कि सैनिकों को आयोजन स्थल के भीतर और बाहर कतर अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। होटलों में भी फुटबॉल टीमों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सशस्त्र सैनिकों की होगी।

कंधे-घुटने ढके हों, कम कपड़ों में आए तो होगी जेल… फीफा वर्ल्ड कप के लिए कतर के रूढ़िवादी नियम
फीफा ने दी पाकिस्तानी सैनिकों को ट्रेनिंग
यह पहला मौका है जब पाकिस्तानी सैनिकों को विदेश में किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की सुरक्षा में तैनात किया गया है। कतर की ओर से 2 बिलियन डॉलर के एक निवेश के बाद अगस्त में पाकिस्तान ने ऐलान किया था कि वह वर्ल्ड कप की सुरक्षा में अपने सैनिकों को कतर भेजेगा। फीफा की एक सिक्योरिटी टीम ने कतर जाने से पहले पाकिस्तानी सैनिकों की ट्रेनिंग दी थी। फीफा टीम ने सैनिकों को स्टेडियम से एग्जिट और एंट्री, फुटबॉल टीमों की सुरक्षा और टूर्नामेंट के दूसरे सुरक्षा पहलुओं के बारे में जानकारी मुहैया कराई है।

कतर के पास छोटी सेना
साल 2010 में फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी हासिल करने के बाद कतर ने 2014 में अनिवार्य सैन्य सेवा की शुरुआती की थी। इसके तहत 18 से 35 साल के पुरुषों को सेना में चार महीने सेवा देने के लिए कहा गया था। सितंबर में कतर ने अपने सैकड़ों नागरिकों को अनिवार्य सैन्य सेवा और सिक्योरिटी चेकपॉइंट्स संचालित करने के लिए विदेशों से वापस बुलाया। कतर की सेना और पुलिसबलों की संख्या काफी कम है जिस वजह से उसे सुरक्षा के लिए दूसरे देशों से मदद मांगनी पड़ रही है।



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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Image Source : AP
चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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