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उद्योग के प्रति विश्वास दर्शाता है हमारा निवेश

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ईशिता आयान दत्त /  11 25, 2022






दुनिया की प्रमुख इस्पात निर्माताओं – आर्सेलर मित्तल और निप्पॉन स्टील के बीच संयुक्त उद्यम आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने भारत की विकास गाथा से उत्साहित होकर विस्तार की शुरुआत की है, जिसमें अपने मौजूदा स्थान गुजरात के हजीरा में क्षमता बढ़ाना और ओडिशा में नए संयंत्रों की स्थापित करना शामिल है। एक बातचीत में आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) के मुख्य कार्याधिकारी और आर्सेलर मित्तल के कार्यकारी उपाध्यक्ष दिलीप उम्मेन ने ईशिता आयान दत्त को बताया कि मूल कंपनियां आर्सेलर मित्तल और निप्पॉन स्टील भारत के संबंध में आशावादी हैं तथा मध्य से लेकर दीर्घावधि में वृद्धि के प्रति आशान्वित हैं। संपादित अंश :

एएम/एनएस इंडिया अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम इकाइयों में वर्ष 2026 की शुरुआत तक तकरीबन 7.4 अरब डॉलर का निवेश करना चाहती है। जब इस्पात की वैश्विक मांग में कमी आ रही है, तो ऐसे में इतने भारी-भरकम विस्तार के साथ आगे बढ़ने का भरोसा किस बात से मिल रहा है?

हमारा क्षमता विस्तार इस इस्पात चक्र या अगले चक्र के नजरिये से नहीं देखा जा सकता है। यह निवेश कार्यक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था और इस्पात उद्योग के लिए मध्य और दीर्घकालिक संभावनाओं में हमारा विश्वास दर्शाता है। आज भी भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का चमकता हुआ सितारा है।

भारत में इस्पात का प्रति व्यक्ति उपभोग वैश्विक औसत का लगभग एक-तिहाई है, जिसका अर्थ यह है कि इजाफे की काफी गुंजाइश है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था विकास पथ का अनुसरण करती है।

मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, गति शक्ति, पीएलआई योजना जैसे अच्छे कार्यक्रम भी हैं, बुनियादी ढांचे पर काफी ज्यादा खर्च से निश्चित रूप से घरेलू स्तर पर इस्पात की खपत को बढ़ावा मिलने वाला है। हम मध्यावधि और दीर्घावधि में वृद्धि को लेकर आशान्वित हैं।

विस्तार का वह अगला चरण क्या है, जिस पर आप विचार कर रहे हैं और इसके लिए किस तरह का निवेश होगा?

हम आने वाले दशक में भारत की 30 करोड़ टन की विकास यात्रा में भाग लेने पर विचार कर रहे हैं। हम हजीरा (गुजरात) और ओडिशा में विस्तार करेंगे, यह एक ग्रीनफील्ड होगा। अन्य जो अवसर मिल सकते हैं, वे इसके अलावा होंगे।

ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की भारत में स्थापना मुश्किल रही है और आर्सेलर मित्तल से बेहतर इसे कोई नहीं जानता। क्या नया संयंत्र स्थापित करने के लिए हालात अधिक अनुकूल हैं?

ग्रीनफील्ड विस्तार मुश्किल हो सकता है। लेकिन हमें ओडिशा सरकार, भारत सरकार और खुद पर भरोसा है। हम मिलकर यह कर सकते हैं।

विस्तार के लिए रकम का इंतजाम कैसे किया जा रहा है, क्या एएम/एनएस इंडिया की आईपीओ लाने की कोई योजना है?

अभी कुछ तो नहीं। हमारे पास आंतरिक स्त्रोत हैं और हमारे पास रकम जुटाने के स्रोत हैं, जो बहुत प्रतिस्पर्धी हैं।

एएम/एनएस इंडिया भारत में चौथी सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है। अगले 5-10 साल में आप इसे किस क्रम में देखते हैं?

हम उस खेल में नहीं हैं। हम वृद्धि जारी रखेंगे, लेकिन हमारा ध्यान सर्वोत्तम तकनीक लाने और यह सुनिश्चित करने पर होगा कि हमारा कार्बन फुटप्रिंट सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी हो। 

क्या आपके आक्रामक विस्तार में आरआईएनएल और एनएमडीसी के विनिवेश में भागीदारी शामिल रहेगी, जब ऐसा होगा?

मैं अभी कोई विशेष नाम नहीं दूंगा। लेकिन हम हमेशा विनिवेश मार्ग या आईबीसी (ऋणशोधन अक्षमता और दिवालिया संहिता) के जरिये अधिग्रहण में संभावित भागीदारी पर विचार करते रहे हैं। अगर यह हमारी शर्तों पर और रणनीति तथा विकास योजना के अनुरूप होता है, तो हम निश्चित रूप से भाग लेंगे।

दूसरा जो नाम सामने आया है, वह है इलेक्ट्रोस्टील। क्या आप इसका मूल्यांकन कर रहे हैं?

कोई भी विकल्प जो हमारे रास्ते में आता है, हम स्पष्ट रूप से उसका मूल्यांकन करते हैं।

इस क्षेत्र और एएम/एनएस इंडिया के लिए निर्यात शुल्क वापस लेने का क्या अर्थ है?

इससे पेलेट निर्यात में मदद मिली है। हमारे पास जो भी अतिरिक्त मात्रा है, हम घरेलू बाजार की जरूरतों और अपनी खपत को पूरा करने के बाद उसका निर्यात कर सकते हैं। इससे बाजार में धारणा में सुधार आता है। यहां तक कि पिछले महीने और उससे पहले के महीने में भी लोग निर्यात कर रहे थे। तो निर्यात शुल्क हटाने से मदद मिलेगी।



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UP By Poll Result 2022: मैनपुरी में डिंपल यादव को भारी बढ़त, रामपुर और खतौली में भी गठबंधन प्रत्याशी आगे

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भाषा / नई दिल्ली December 08, 2022






उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना के ताजा रुझानों में समाजवादी पार्टी (SP) की उम्मीदवार डिंपल यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रघुराज सिंह शाक्य पर एक लाख से अधिक मतों की बेहद मजबूत बढ़त बना ली है। रामपुर विधानसभा उपचुनाव में भी सपा के उम्मीदवार आगे हैं जबकि खतौली में उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रत्याशी भी बढ़त बनाए हुए हैं। 

 

मैनपुरी लोकसभा सीट और दोनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव की मतगणना जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक डिंपल यादव शाक्य से 1.11 लाख के करीब मतों से आगे हैं। फिलहाल, वह बेहद मजबूत स्थिति में दिख रही हैं। खतौली सीट पर रालोद प्रत्याशी मदन भैया ने मतगणना के ताजा आंकड़ों में भाजपा उम्मीदवार राजकुमारी सैनी पर 8,534 मतों से बढ़त बना ली है। रामपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझान में सपा के आसिम राजा अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के आकाश सक्सेना से 5,100 मतों से आगे हैं। 

 

सपा के विधायक और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने एक ट्वीट में कहा, ‘मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं से मिले आशीर्वाद, स्नेह और अपार जनसमर्थन के लिये सम्मानित जनता, शुभचिंतकों, मित्रों और कर्मठ कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार। जसवंत नगर की सम्मानित जनता द्वारा डिंपल यादव को दिये गये आशीर्वाद के लिये जसवंतनगर वासियों को सहृदय धन्यवाद।’

 

शिवापाल ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की और कहा कि परिवार एकजुट होकर लड़ा, इसलिए पार्टी ‘बड़ी जीत’ की ओर अग्रसर है। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और समाजवादी सरकार ने मैनपुरी में जो विकास किया है, उसकी वजह से यह ‘बड़ी जीत’ मिली है। मैनपुरी में आज भी नेताजी का जलवा कायम है।’

 

सपा अध्यक्ष से अपने सभी गिले-शिकवे भुलाकर मैनपुरी उपचुनाव में डिंपल के पक्ष में प्रचार करने वाले शिवपाल ने कहा, ‘अब जो भी चुनाव होगा, हमारा पूरा परिवार एक होकर ही लड़ेगा। हमारी बहू (डिंपल) एक बड़ी जीत की ओर इसलिए अग्रसर है, क्योंकि पूरा परिवार एक होकर लड़ा।’ शिवपाल ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के निर्देश पर मैनपुरी के अधिकारियों ने सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न किया। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सपा को रिकॉर्ड वोट दिए। 

 

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा कि उपचुनाव के जो रुझान आ रहे हैं, उससे जाहिर होता है कि सपा अगले लोकसभा चुनाव में बढ़त बनायेगी। मौर्य ने एक ट्वीट में कहा था कि उपचुनाव के नतीजे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से दूरगामी संकेत देंगे।

 

मैनपुरी लोकसभा सीट मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण रिक्त हुई है जबकि रामपुर सदर और खतौली विधानसभा सीट क्रमशः सपा विधायक आजम खां और भाजपा विधायक विक्रम सैनी को अलग-अलग मामलों में सजा सुनाए जाने के कारण खाली हुई हैं। इनमें से मैनपुरी लोकसभा और रामपुर सदर विधानसभा क्षेत्र सपा के गढ़ माने जाते हैं। इन सीटों के उपचुनाव के तहत इसी महीने पांच दिसंबर को मतदान हुआ था। 



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Gujarat Election Result 2022 : रुझानों में भाजपा रिकार्ड जीत की ओर

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गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रिकार्ड जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। पांचवें दौर की मतगणना के बाद वह विधानसभा की 182 सीटों में से 155 पर बढ़त हासिल कर चुकी है।

निर्वाचन आयोग के मुताबिक कांग्रेस 18 सीटों के साथ दूसरे और आम आदमी पार्टी छह सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है।

तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त हासिल कर रखी है। आंकड़ों के मुताबिक भाजपा को अभी तक 53.62 प्रतिशत मत मिले हैं जबकि कांग्रेस को 27 और आप को 13 प्रतिशत।

यही रूझान आगे भी जारी रहे तो भाजपा ना सिर्फ गुजरात विधानसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी, बल्कि वह 149 सीटों पर जीत के कांग्रेस के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगी। कांग्रेस ने 1985 के चुनाव में माधवसिंह सोलंकी के नेतृत्व में 149 सीटें जीती थी। राज्य विधानसभा के चुनाव में किसी भी दल द्वारा जीती गई सीटों की यह सर्वाधिक संख्या है। अभी तक यह एक रिकार्ड है। भाजपा राज्य में लगातार सातवीं विधानसभा चुनाव जीत की ओर अग्रसर है।

साल 1995 से उसने राज्य के सभी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है। भाजपा यदि यह चुनाव जीत लेती है तो वह पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के लगातार सात चुनाव के जीत के रिकार्ड की भी बराबरी कर लेगी। ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस)’ के शोध कार्यक्रम ‘लोकनीति’ के सह-निदेशक संजय कुमार ने कहा कि भाजपा अगर गुजरात का चुनाव जीत लेती है तो इससे उसकी हौंसला आफजाई होगी।

उन्होंने कहा कि यह भाजपा के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरेगा और इस धारणा को मजबूत करेगा कि पार्टी 2024 का लोकसभा चुनाव जीतेगी। मोदी सरकार बढ़ती महंगाई, धीमी वृद्धि और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन आर्थिक परेशानियों से गुजरात में भाजपा की लोकप्रियता में सेंध लगने की संभावना नहीं है। गुजरात दशकों से भाजपा का गढ़ रहा है।

मोदी 2001 से 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री थे। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना राज्य के 37 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में बृहस्पतिवार सुबह शुरू हुई। ‘आप’ के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिससे कांग्रेस की परेशानी बढ़ी हुई है। गुजरात में बहुमत के लिए कुल 182 सीट में से किसी भी पार्टी को 92 का आंकड़ा छूना होगा। चुनाव बाद के सर्वेक्षणों में भाजपा के आसान जीत दर्ज करने और लगातार सातवीं बार राज्य में सरकार बनाने का पूर्वानुमान लगाया गया है।

इस महीने की शुरुआत में हुए दो चरणों के चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस और आप के प्रदर्शन पर अधिक नजरें थीं। दोनों दल राज्य में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल करने के लिए संघर्ष में उलझी हुई दिख रही हैं। कांग्रेस से 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव के अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद नहीं थी। अब तक के रुझानों के मुताबिक कांग्रेस को आम आदमी पार्टी ने खास नुकसान पहुंचाया है।

पार्टी की ओर से चुपचाप और बगैर भारी शोर शराबे के चुनावी अभियान चलाने की रणनीति विफल साबित होती दिख रही है। कांग्रेस ने मुख्य रूप से घर-घर अभियान पर जोर दिया। साल 2017 के चुनावों में आक्रामक प्रचार करने वाले उसके नेता राहुल गांधी इस बार के चुनाव से दूर रहे। उनका पूरा जोर भारत जोड़ो यात्रा पर रहा।

कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी चुनाव प्रचार से दूर रहे। यह देखा जाना बाकी है कि इस चुनाव में आप के प्रदर्शन से क्या उसके नेता अरविंद केजरीवाल को 2024 में होने वाले संसदीय चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में अपनी जगह पक्की करने में मदद मिलती है या नहीं। आप ने इस चुनाव में आक्रामक तरीके से चुनाव अभियान चलाया था। गुजरात का चुनाव उसके लिए खुद को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित करने का एक अवसर भी था।

भाजपा के कई विधायक अब तक के रुझानों में आगे चल रहे हैं। इनमें जीतू वाघानी, हार्दिक पटेल, पूर्णेश मोदी, कनुभाई देसाई और कई अन्य चर्चित चेहरे शामिल हैं। कांग्रेस के दो प्रमुख नेता परेश धनानी और जिग्नेश मेवानी क्रमश: अमरेली और बडगाम में अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों से पीछे है। हालांकि उसके सबसे वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया पोरबंदर से जीत की ओर बढ़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदान गढ़वी खम्भालिया विधानसभा सीट से आगे हैं।

जमजोधपुर, देडियापारा, धारी, व्यारा, बोताड, भिलोदा, गरियाधर और लिंबायत और कुछ अन्य सीटों पर भी आप के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया सूरत के कतरगाम सीट पर पीछे हैं। वराछा रोड से आप के उम्मीदवार अल्पेश कथीरिया भी पीछे हैं। धनेरा और वागोडिया से निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त हासिल कर रखी है।

भाजपा ने राज्य में 27 साल के शासन के बाद सत्ता विरोधी भावनाओं से जूझते हुए यह चुनाव लड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पार्टी के लिए ‘तुरुप का इक्का’ थे और सत्तारूढ़ दल ने सत्ता विरोधी लहर के मुकाबले के लिये ‘ब्रांड मोदी’ पर भरोसा किया। चुनावों में प्रमुख मुद्दों में बेरोजगारी, मूल्य वृद्धि, राज्य के कुछ हिस्सों में पानी नहीं पहुंचना, बड़ी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और किसानों को अत्यधिक बारिश के कारण फसल क्षति का उचित मुआवजा नहीं मिलना था।

इस बार मतदान प्रतिशत 2017 की तुलना में लगभग चार प्रतिशत कम हुआ। राज्य में 2017 में 68.39 प्रतिशत के मुकाबले इस बार सिर्फ 64.33 प्रतिशत मतदान हुआ। साल 2017 में भाजपा ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी। भारतीय ट्राइबल पार्टी को दो और एक सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में गई थी। तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की थी। 



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केरल में अदाणी पोर्ट पर निर्माण कार्य फिर से शुरू

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विझिंजम समुद्री बंदरगाह परियोजना स्थल पर निर्माण गुरुवार को फिर से शुरू किया गया है। परियोजना कार्य बंदरगाह निर्माण के खिलाफ मछुआरों के 130 दिनों से चल रहे आंदोलन के कारण बंद पड़ा था, जिसे दो दिन उन्होंने वापस लिया।

अदाणी समूह के एक सूत्र द्वारा साक्षा किए गए परियोजना स्थल की तस्वीरों में निर्माण सामग्री से लदे ट्रक दिखाई दे रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में प्रदर्शनकारी नहीं हैं, जो वहां चार महीने से अधिक समय से बैठे हुए थे।

आंदोलन को मंगलवार को वापस ले लिया गया और अगले दिन प्रदर्शनकारियों ने केरल उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बंदरगाह के बाहर विरोध स्थल पर लगाए गए तम्बू हटाए जा रहे हैं।

परियोजना स्थल पर बाधा नहीं डालने के अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने के लिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अवमानना ​​​​कार्रवाई के लिए अडानी समूह द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया था।

आंदोलन के बंद होने और प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध स्थल पर तम्बू हटाने का आश्वासन देने के साथ ही उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिकाओं को बंद कर दिया। सूत्र ने मंगलवार को बताया कि को निर्माण कार्य को जल्द शुरू किया जाएगा, और साथ ही ये कुछ ही दिनों में अपनी पुरी गति पकड़ लेगा। इसके बाद बृहस्पतिवार को बंदरगाह पर निर्माण कार्य शुरू हुआ और सूत्र ने कहा कि जल्द ही नौकाओं आवाजाही शुरू हो जाएगी और कुछ दिनों में यह पूरे जोरों पर काम करेगा।

सूत्र ने कहा कि 2,960 मीटर लंबे बांध के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें से लगभग 1,400 मीटर का काम पूरा हो चुका है।



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