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ईरान की कट्टरपंथी और रूढ़‍िवादी सोच से लड़ने वाली एल्‍नाज रेकाबिक गायब, ईरानी अथॉरिटीज पर शक

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तेहरान: अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर मंगलवार को हलचल उस समय बढ़ गई जब ईरान की पर्वतारोही एल्नाज रेकाबिक के गायब होने की खबरें आईं। रेकाबी ने बिना हिजाब के दक्षिण कोरिया में एक प्रतियोगिता में भाग लिया था। इसके बाद वह दक्षिण कोरिया से तो निकल गईं लेकिन कहां, इस बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है। रेकाबी ने हिजाब के बिना प्रतियोगिता में शामिल हुई थीं। अब उनके गायब होने के बाद कई तरह की बातें हो रही हैं। ईरान की मीडिया की मानें तो ऐसा हो सकता है कि ईरान के अधिकारियों ने उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि ईरान की सरकार की तरफ से इस बात से इनकार कर दिया गया है।

बिना हिजाब हुईं शामिल
ऐलनाज ने कई प्रतियोगिताओं में अपने देश को मेडल दिलाए हैं। हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन के तहत ही उन्‍होंने दक्षिण कोरिया में बिना हिजाब या सिर ढंके प्रतियोगिता में शामिल होने का फैसला किया था। 16 सितंबर को 22 साल की माशा अमीनी की मौत के बाद से ही ईरान के हालात हिंसक बने हुए हैं। माशा को देश की मॉरेलिटी पुलिस ने कपड़ों की वजह से गिरफ्तार कर लिया था। हिरासत में मौत होने की वजह से देश में जगह-जगह प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया।

ईरान में लगा था बैन
ईरान में हो रहे प्रदर्शनों में स्‍कूली बच्‍चों से लेकर ऑयल वर्कर्स और कई और लोग शामिल हो गए हैं। यहां पर सड़कों पर हिजाब के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। साल 2009 में राष्‍ट्रपति चुनावों के दौरान देश में इस तरह के उग्र प्रदर्शन हुए थे। अब 13 साल बाद इन प्रदर्शनों ने अथॉरिटीज को परेशान कर दिया है। सियोल स्थित ईरानी दूतावास की मानें तो रेकाबी ने मंगलवार की सुबह फ्लाइट पकड़ी थी।

बीबीसी की रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो एल्‍नाज पर बैन लगा हुआ था लेकिन इसके बाद भी वह अपने देश के कई लोगों के साथ संपर्क में थीं। सूत्रों की मानें तो ईरानी अथॉरिटीज ने एल्‍नाज का पासपोर्ट और उनका मोबाइल फोन जब्‍त कर लिया है। बुधवार को उन्‍हें वापस आना था लेकिन वह नहीं लौटी हैं।

क्‍या एविन जेल में हैं बंद
ईरानी-कनैडियन वेबसाइट ईरान वायर की जर्नलिस्‍ट माजियार बाहारी ने ईरान पर आरोप लगाया है कि एल्‍नाज को गिरफ्तार करके देश की कुख्‍यात एविन जेल में डाल दिया गया है। माजियार को भी ईरान में एक बार गिरफ्तार कर लिया गया था। एविन जेल में हाल ही में आग लग गई थी और आठ कैदियों की मौत हो गई थी।

दूतावास ने साधी चुप्‍पी
ईरानी दूतावास ने इस खबर को पूरी तरह से झूठ करार दिया है। दूतावास की तरफ से एल्‍नाज की एक फोटोग्राफ भी ट्वीट की गई है जिसके बाद शक और गहरा गया है। यह फोटोग्राफ रूस में हुई एक प्रतियोगिता की है जिसमें उन्‍होंने हिजाब पहना है। यहां पर उन्‍होंने कांस्‍य पदक जीता था। दूतावास की तरफ से अब किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया जा रहा है।



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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