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इमरान खान के ‘दुश्‍मन’ को शहबाज ने बनाया पाकिस्‍तान का नया आर्मी चीफ, जानें कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने काफी आशंकाओं और अफवाहों के बीच ले. जनरल असीम मुनीर को देश का अगला सेना प्रमुख चुना है। सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब की तरफ से ऐलान किया गया है कि पीएम ने अपने पास मौजूद शक्तियों का प्रयोग करते हुए ले. जनरल मुनीर को सेना प्रमुख के तौर पर चुना है। मुनीर, 29 नवंबर को रिटायर होने वाले जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे। जनरल मुनीर के अलावा ले. जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को ज्‍वॉइन्‍ट चीफ्स ऑफ स्‍टाफ कमेटी (CJCSC) के तौर पर नियुक्‍त किया गया है। मरियम औरंगजेब के मुताबिक राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी को इस बारे में जानकारी दे दी गई है और इससे जुड़ा विवरण भी उन्‍हें भेज दिया गया है।

बढ़ाया गया कार्यकाल
दिलचस्‍प बात है कि ले. जनरल मुनीर सितंबर 2022 में रिटायर होने वाले थे लेकिन उनका कार्यकाल बढ़ाकर 27 नवंबर तक किया गया था। अब यह तय हो चुका है कि अगले तीन साल के लिए वह सेना प्रमुख के पद पर रहेंगे। पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का कहना है कि मुनीर, सेना प्रमुख के लिए उपयुक्‍त हैं और वही पूर्व पीएम इमरान खान को सही जवाब दे सकते हैं।
पाकिस्तान में नए सेना प्रमुख के लिए तीन नाम सबसे आगे, इन्हें मिली कमान तो कैसे होंगे भारत के साथ संबंध?बाजवा के फेवरिट
ले. जनरल मुनीर, जनरल बाजवा के फेवरिट रहे हैं और वह चाहते थे कि मुनीर ही सेना प्रमुख बने। अक्‍टूबर 2018 में मुनीर को बाजवा की सिफारिश पर ही इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई का चीफ बनाया गया था। लेकिन सिर्फ आठ महीने बाद यानी मई 2019 में उन्‍हें इस पद से हटा दिया गया था। जनरल मुनीर ने ही इमरान खान की पत्‍नी बुशरा बीबी से जुड़े भ्रष्‍टाचार के बारे में बताया था। इन आरोपों के बाद ही इमरान ने जनरल मुनीर को उनके पद से हटा दिया था।

सबसे सीनियर जनरल मुनीर
जनरल बाजवा के अलावा ले. जनरल मुनीर का नाम सबका फेवरिट था। मुनीर इस समय सबसे सीनियर हैं। बताया जा रहा है कि उनका नाम प्रधानमंत्री के पास भेजी जाने वाली लिस्‍ट में सबसे ऊपर था। सेना प्रमुख के बारे में उनके नाम का ऐलान होने से पहले व‍ह रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्‍वार्ट्स में क्‍वार्टर मास्‍टर जनरल के पद पर हैं।

ले. जनरल असीम मुनीर ने पाकिस्‍तान की ओपेन ट्रेनिंग सर्विस (OTS) के जरिये सेना को ज्‍वॉइन किया था। यहां से ले. जनरल मुनीर गुंजरावाला कोर कमांडर के पद पर पहुंचे और दो साल तक इस पोस्‍ट पर सेवायें दीं। जनरल मुनीर को टू-स्‍टार बनने में काफी समय लग गया और सितंबर 2018 में वह इस पद पर आ सके। पाकिस्तान का अगला आर्मी चीफ कौन होगा? 3 और 4 के बाद लकी साबित होगा ‘नंबर-5’? जानें क्या है नंबरों का राज
इमरान से क्‍यों है दुश्‍मनी
पाकिस्‍तान के सीनियर जर्नलिस्‍ट नजम सेठी ने ले. जनरल मुनीर को उनके पद से क्‍यों हटाया गया, इसका खुलासा एक इंटरव्‍यू में किया था। उन्‍होंने बताया था कि जिस समय जनरल मुनीर, डीजी आईएसआई थे तो उस समय उन्‍होंने इमरान से कहा था कि पंजाब प्रांत के अंदर हालात बेहद खराब हैं। यहां पर उन्‍होंने, इमरान को सारी स्थिति के बारे में विस्‍तार से बताया था। ले. जनरल मुनीर ने पूर्व पीएम से कहा था कि अगर यहां पर नेतृत्‍व में परिवर्तन नहीं किया गया तो फिर सेना और सरकार के लिए परेशानियां पैदा हो सकती हैं।

बाजवा से शिकायत
जनरल मुनीर ने इमरान को स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा था कि जो हालात हैं उनकी वजह से सेना का नाम भी खराब हो रहा है क्‍योंकि वह इमरान के साथ है। इमरान ने यह सबकुछ सुनने के बाद पहले तो कुछ नहीं कहा फिर जनरल बाजवा से कहा कि उन्‍हें यह व्‍यक्ति पसंद नहीं है। ऐसे में इसे इसके पद से हटाया जाये। इसके बाद ही जनरल मुनीर को गुंजरावाला भेज दिया गया।



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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज, लोगों के सपोर्ट में बोला UN- ”प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करना सीखे चीन’

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चीन में अनलॉक करने की डिमांड तेज

चीन में कोरोना के चलते लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। एक तो कोरोना का प्रकोप ऊपर से सरकार की सख्ती और ना मानने पर पुलिस की कार्रवाई ने लोगों को प्रदर्शन करने पर मजूबर कर दिया है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चीन को दो टूक सुनाया है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने चीन से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए लोगों को हिरासत में नहीं लेने का आग्रह किया है।

‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ का विरोध 

चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। वहीं कोरोना के चलते पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। 

लोगों को पुलिस की कारों में बांधा गया

शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। 

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दुनिया का सबसे बड़ा एक्टिव ज्वालामुखी फटा, अमेरिका में बह रही आग की नदियां, आसमान हुआ लाल

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World Largest Volcano: दुनिया का सबसे बड़ा सक्रिया ज्वालामुखी हवाई का मौना लोआ है। ये ज्वालामुखी रविवार को फट गया है। अभी ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा शिखर पर ही है। इससे स्थानीय लोगों को कोई खतरा नहीं है। यूनाइटेट स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे लगातार लावा के बहाव की निगरानी कर रहा है।

 



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चीन में ‘A4 क्रांति’, क्यों सादे कागज लहरा कर जिनपिंग की सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन?

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बीजिंग: चीन में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कागज के खाली पन्ने एक प्रतिष्ठित वस्तु बन गए हैं, जिसे कई लोग ‘श्वेत पत्र क्रांति’, ‘कोरी चादर क्रांति’ या ‘ए4 क्रांति’ कहते हैं। देशभर में विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान लोगों को कागज की एक कोरी चादर पकड़े देखा गया। कुछ का कहना है कि यह सेंसरशिप से बचने का एक तरीका है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वायरल वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है, जिसमें नानजिंग के कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी में एक महिला कोरे कागज के एक लंबे टुकड़े का एक छोर पकड़े हुई है और दूसरे छोर को एक अज्ञात व्यक्ति पकड़े हुआ है।

उस रात बाद के एक अन्य वीडियो में कैंपस में दर्जनों और छात्रों को श्वेत पत्र के टुकड़ों को पकड़े हुए देखा गया, जो मौन खड़े थे। सप्ताहांत में अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए। शनिवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाली एक महिला ने बीबीसी को बताया, ‘‘निश्चित रूप से कागज पर कुछ भी नहीं लिखा था, लेकिन हम जानते हैं कि यह किस चीज का प्रतीक है।’’

छात्रों के बीच प्रचलित है विरोध
कागज निर्माता शंघाई एम एंड जी स्टेशनरी ने उन अफवाहों का खंडन किया है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सभी ए4 पेपर को अलमारियों से हटा लिया है। कागज के खाली टुकड़े चीन में प्रदर्शनकारियों के लिए अवज्ञा का प्रतीक बन गए हैं, खासकर विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच। वे देश में लगाए गए कोविड-19 प्रतिबंधों पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं।

चीन में हो रहा मौन विरोध
यह मौन विरोध का एक रूप है, लेकिन उनके लिए सेंसरशिप या गिरफ्तार होने से बचने का एक तरीका है। सोमवार को कंपनी ने शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर एक आपातकालीन नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि एक जाली दस्तावेज ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। बीबीसी ने बताया कि एम एंड जी के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था। उत्पादन और संचालन कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।



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