Connect with us

International

इजराइल और गाजा की लड़ाई में अब तक बिछीं 48 लाशें, मृतकों में 17 बच्चे भी शामिल

Published

on


Image Source : AP
Rockets are launched from the Gaza Strip towards Israel, in Gaza City, Sunday, Aug. 7, 2022.

Highlights

  • इजराइल-गाजा संघर्ष में अब तक 48 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • लड़ाई में 17 बच्चे मारे जा चुके हैं जबकि कई घायल हुए हैं।
  • इस संघर्ष में इजराइल का एक भी नागरिक हताहत नहीं हुआ है।

Israel Gaza Conflict: इजराइल और गाजा के इस्लामी जेहादी विद्रोहियों के बीच पिछले हफ्ते के अंत में हुई लड़ाई में काफी खून बहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लड़ाई में फिलीस्तीन की तरफ से मारे जाने वाले लोगों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 48 हो गई। लड़ाई में जान गंवाने वालों में 11 साल की एक लड़की भी शामिल है, और अब तक कुल 17 बच्चों की मौत हो चुकी है। दोनों के बीच हुए संघर्ष में 8 और 14 साल के 2 बच्चे भी घायल हुए हैं जिन्हें यरुशलम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति गंभीर है।

इजराइल पर दागे गए सैकड़ों रॉकेट

गाजा में इस्लामी जेहादी विद्रोहियों को निशाना बनाकर पिछले हफ्ते किए गए हमलों में 300 से ज्यादा फिलीस्तीनी घायल हुए। हमलों के बाद जेहादी संगठन ने इजराइल पर सैकड़ों रॉकेट दागे हैं। यरुशलम के मुकासिद अस्पताल में 11 वर्षीय लड़की लयान अल शायेर की मौत से लड़ाई में मारे गए बच्चों की संख्या 17 हो गई है। वहीं, 14 वर्षीय नईफ अल-अवदात और 8 वर्षीय मोहम्मद अबु काफिया मुकासिद ICU में भर्ती हैं। इजराइल ने कहा है कि फिलीस्तीनी विद्रोहियों द्वारा दागे गए राकेट लक्ष्य से चूक गए और इन घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है।

Israel Gaza Conflict, Israel Palestine Conflict, Israel Palestine, Palestine News

Image Source : AP

Mourners pray over the bodies of six Palestinians including children killed in an explosion in Jebaliya refugee camp.

पिछले 15 सालों में हो चुके हैं 4 युद्ध
माना जा रहा है कि इजराइल के हमलों में 30 से ज्यादा फिलीस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें आम नागरिक और कई विद्रोही शामिल हैं। इजराइल के हमले में मारे गए विद्रोहियों में 2 इस्लामिक जेहादी कमांडर भी शामिल हैं। बता दें शुक्रवार को शुरू हुई लड़ाई रविवार को संघर्ष विराम के बाद थम गई। इस लड़ाई में इजराइल का कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ। इजराइल और गाजा के विद्राही हमास शासकों के बीच पिछले 15 वर्षों में 4 युद्ध और कई छोटी लड़ाइयां हो चुकी हैं। 

Israel Gaza Conflict, Israel Palestine Conflict, Israel Palestine, Palestine News

Image Source : AP

Israelis rest in a bomb shelter following rocket attacks fired from the Gaza Strip towards Israel, in Ashkelon, southern Israel, Sunday, Aug. 7, 2022.

इजराइल की हिरासत में 4400 फिलीस्तीनी
इस बीच फिलीस्तीन के एक कैदी को भूख हड़ताल से तबीयत खराब होने के बाद गुरुवार को इजराइल की जेल से अस्पताल ले जाया गया। शख्स का नाम खलील अववदेह है और वह 160 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। गाजा की लड़ाई के दौरान 40 साल का अववदेह का मुद्दा चर्चा में आया। गाजा के विद्रोहियों ने सीजफायर के तहत अववदेह की रिहाई की मांग की थी। इजराइल ने फिलहाल लगभग 4400 फिलीस्तीनियों को हिरासत में रखा है, जिनमें घातक हमले करने वाले विद्रोही, तथा विरोध प्रदर्शन या पथराव के लिए गिरफ्तार किए गए लोग भी शामिल हैं।

Latest World News





Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International

इन्होंने बना दिया दुनिया में लंबी अवधि तक राष्ट्रपति बने रहने का विश्व रिकॉर्ड, फिर बंपर मतों से जीते

Published

on

By


Image Source : AP
तियोदोरो ओबियांग (इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति)

Longest Serving President in the World: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे लंबी अवधि तक निर्वाचित राष्ट्रपति बने रहने का रिकॉर्ड किसके पास है?…क्या आप जानते हैं कि हर बार चुनाव में एक ही शख्स आखिर किन वजहों से राष्ट्रपति के चुनाव में बार-बार जीत जाता है? …आखिर कुछ तो वजह होगी जो यह व्यक्ति हर बार चुनाव में विजय पताका फहराता आ रहा है। इस बार वर्ष 2022 के चुनाव में भी जीत हासिल कर 43 वर्षों तक लगातार राष्ट्रपति बने रहने का दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। आइए आपको बताते हैं कि यह शख्स है कौन?

अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी का नाम आपने शायद सुना होगा। यह देश 1968 में स्पेन से आजाद हुआ था। इस देश के पहले राष्ट्रपति फ्रांसिस्को मैकियास थे। वर्ष 1979 में पहली बार तियोदोरो ओबियांग अपना चाचा फ्रांसिस्को का तख्तापलट कर सत्ता में आ गए। तब से वह लगातार राष्ट्रपति चुने जा रहे हैं। हर बार उन्हें 90 फीसदी से भी अधिक वोट मिलता है। वह करीब 43 वर्षों से इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति हैं। इस बार के चुनाव में भी ओबियांग को 95 फीसदी मत मिले हैं।

लगातार छठवीं बार ओबियांग ने जीता चुनाव


वर्ष 2022 में ओबियांग ने लगातार छठवीं बार राष्ट्रपति का चुनाव जीता है। इक्वोटोरियल गिनी को जब से आजादी मिली है तब से अब तक केवल दो ही राष्ट्रपति हुए हैं। ओबियांग दूसरे और मौजूदा राष्ट्रपति हैं। पिछले 43 वर्षों से उनका देश पर शासन है। वह काफी सख्त मिजाज के माने जाते हैं। उनका अपने विरोधियों पर पूर्ण नियंत्रण है। उनकी अफ्रीकी देशों में भी काफी अच्छी पकड़ बताई जाती है। ओबियांग वर्ष 2011 से 2012 तक अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

14 लाख है देश की आबादी

इक्वेटोरियल गिनी आबादी के लिहाज से बहुत छोटा देश है। यहां की कुल आबादी केवल 14 लाख है। बावजूद यहां के लोग गरीबी का जीवन जी रहे हैं। इस देश में लोगों की आय का कोई खास साधन नहीं है। वर्ष 1996 में यहां तेल का विशाल भंडार खोजा गया था। मगर उसका फायदा सिर्फ राजनीतिक लोगों को ही मिला। इससे उनकी आर्थिक तरक्की हुई, लेकिन जनता की हालत जस की तस है। यहां की जनता बदहाली की जिंदगी जी रही है। ओबियांग तानाशाह किस्म के बताये जाते हैं, उनका विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है।

Latest World News

India TV पर हिंदी में ब्रेकिंग न्यूज़ Hindi News देश-विदेश की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ें और अपने आप को रखें अप-टू-डेट। Around the world News in Hindi के लिए क्लिक करें विदेश सेक्‍शन





Source link

Continue Reading

International

चीन में क्‍यों लग रहे हैं ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो’ के नारे, क्‍या जाने वाली है सबसे ताकतवर नेता की कुर्सी!

Published

on

By


बीजिंग: बीजिंग, शंघाई, उरुमकी, नानजिंग, गुआनझोहू, वुहान और चीन के कम से कम एक दर्जन शहरों में इस समय जनता सड़कों पर उतरी हुई है। राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग अपने तीसरे कार्यकाल का सपना संजो चुके हैं और मार्च 2023 में उनका यह सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन ये प्रदर्शन उनके लिए मुसीबत बन चुका है। कोविड-19 की वजह से देश में जो जीरो कोविड नीति लागू की गई है, उसे लेकर जनता का गुस्‍सा सांतवें आसमान पर पहुंच चुका है। जिनपिंग के खिलाफ नाराजगी सड़कों पर देखी जा सकती है। जनता ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो’ नारे लगा रही है। जिस कोविड को लेकर गुस्‍सा अमेरिका से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक में नजर आ रहा था, वही अब चीन में भी नजर आने लगा है। कोविड केसेज भले ही कुछ कम हुए हों मगर इसके बाद भी लॉकडाउन की वजह से नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वुहान में हालात मुश्किल
जिस वुहान से कोविड की शुरुआत हुई थी, वहां का नजारा जिनपिंग और उनके प्रशासन को चौंका सकता है। यहां पर प्रदर्शनकारी चिल्‍ला रहे हैं, ‘यह वुहान से शुरू हुआ था और यहीं पर खत्‍म होगा।’ नाराज जनता ने लोहे की बैरीकेडिंग तक को तोड़ दिया, कोविड टेस्‍ट कराने से मना कर दिया और यहां तक लॉकडाउन को खत्‍म करने की मांग तक कर डाली। दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस का पहला केस वुहान में ही मिला था। यहां से यह पूरी दुनिया में पहुंचा और अब तक इसका असर देखा जा सकता है।

जीरो कोविड नीति की वजह से देश के बिजनेस ठप पड़े हैं और परिवारों को कई हफ्तों तक आइसोलेशन में रखा जा रहा है। इनका कहना है कि खाना भी सीमित मात्रा में मिल रहा है और दवाईयां भी ठीक से नहीं मिल रही हैं। पूरी दुनिया में जहां अब लोगों के लिए जीवन आसान हो रहा है तो वहीं चीन की जनता को कोविड के कारण कड़े प्रतिबंधों से गुजरना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों पर मिर्च का स्‍प्रे

सत्‍ताधारी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के खिलाफ जनता की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। चीन के लोगों का मानना है कि जिनपिंग और उनकी सरकार को न तो लॉकडाउन के आर्थिक पहलू की चिंता और न ही उन्‍हें इसकी मानवीय कीमत का कोई अंदाजा है। शंघाई में तो पुलिस ने हद ही कर दी। यहां पर 300 लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने काली मिर्च का स्‍प्ने तक यूज किया। यहां पर जनता नारे लगा रही थी, ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो, कम्‍युनिस्‍ट पार्टी गद्दी छोड़ो।’ इसके साथ ही लोग चिल्‍ला रहे थे, ‘शिनजियांग को अनलॉक करो, चीन को अनलॉक करो,’ ‘पीसीआर टेस्‍ट नहीं चाहिए, प्रेस की आजादी चाहिए।’
चीन में टूटा सब्र का बांध‍! कोरोना केस 30 हजार के पार लेकिन मंजूर नहीं लॉकडाउन, सड़कों पर भारी प्रदर्शन
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारियों की भीड़ बढ़ती गई, पुलिस के साथ हिंसा भी बढ़ गई। उरुमकी से सामने आए एक व‍ीडियो में लोगों को कहते हुए सुना जा सकता है, ‘कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को हटाओ, जिनपिंग को हटाओ।’ पिछले हफ्ते उरुमकी के एक अपार्टमेंट में आग लगने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस अपार्टमेंट में आंशिक लॉकडाउन लगा था। यहां पर कड़े कोविड नियमों की वजह से राहत और बचाव कार्य मुश्किल हो रहा था। इस घटना के बाद से जनता काफी भड़क गई थी।

केसेज में तेजी से इजाफा
रविवार को चीन में 39791 केसेज आए हैं। यह लगातार चौथा दिन है जब कोविड के केसेज इतने बढ़े हैं। एक दिन पहले ही यानी शनिवार को 35,183 केसेज आए थे। चीन की राजधानी बीजिंग और कई बड़े शहरों में संक्रमण को रोकने के लिए कड़ी मशक्‍कत करनी पड़ रही है। बीजिंग में पिछले हफ्ते की तुलना में केसेज में 66 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। चीन में इतने बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन आम बात नहीं है। कई नागरिक अब सोशल मीडिया में आकर अपना गुस्‍सा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर चीन ने सबसे ज्‍यादा प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन अब इस प्‍लेटफॉर्म पर भी नियंत्रण करने में मुश्किल आ रही है।



Source link

Continue Reading

International

‘शी जिनपिंग पद छोड़ो’, चीन में टूटा लोगों के सब्र का बांध! जानिए वजह

Published

on

By


Image Source : AP
चीन में लोगों का विरोध प्रदर्शन

बीजिंग: चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। कोरोना का प्रसार रोकने के लिए चीन में लॉकडाउन, बड़े स्तर पर टेस्टिंग और यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। कोरोना के मामले के तीसरे साल में जाने के बीच चीन में एक के बाद एक पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

प्रदर्शनकारियों को पुलिस की कारों में बांधा


शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। चीन में शनिवार को 34,398 कोरोना केस सामने आए। शुक्रवार को यह आंकड़ा 31,928 था जो संक्रमण के मामलों में आए हालिया उछाल को दिखाता है।

china covid

Image Source : AP

प्रदर्शनकारी

जिनपिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सुदूर उत्तर-पश्चिम शहर उरुमकी में एक विरोध प्रदर्शन के बाद अशांति फैली है, जहां एक टावर ब्लॉक में आग लगने से 10 लोगों की मौत के बाद लॉकडाउन नियमों को दोष दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि चीनी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि कोविड प्रतिबंधों के कारण मौतें हुईं, लेकिन उरुमकी में अधिकारियों ने शुक्रवार देर रात माफी मांगी और कोविड पाबंदियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर ‘व्यवस्था बहाल’ करने का वादा किया।

शी जिनपिंग पद छोड़ो, कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो जैसे नारे लगे

शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। लोगों को खाली बैनर पकड़े देखा गया, जबकि अन्य लोगों ने उरुमकी में पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए मोमबत्तियां जलाईं और फूल चढ़ाए। बता दें कि इस तरह की मांगें चीन के भीतर एक असामान्य दृश्य हैं, जहां सरकार और राष्ट्रपति की किसी भी सीधी आलोचना के परिणामस्वरूप कठोर दंड दिया जा सकता है।

china covid

Image Source : AP

प्रदर्शनकारी

कोविड प्रतिबंधों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन

सरकार विरोधी नारों का नेतृत्व करने वाले प्रदर्शनकारियों को ले जाया गया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में धक्का भी दिया। स्नैप लॉकडाउन ने पूरे देश में गुस्सा पैदा कर दिया है और कोविड प्रतिबंधों की वजह से झेंग्झौ से ग्वांगझू तक हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

Latest World News





Source link

Continue Reading