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अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान के साथ दोस्ती बढ़ा रहा दक्षिण कोरिया? समझे पर्दे के पीछे का खेल

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पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एमओयू पर साइन किया है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते के पीछे अमेरिका का हाथ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अमेरिका के कहने पर दक्षिण कोरिया ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ क्यों बढ़ाया। समझिए कारण



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US Pakistan Ban: पाकिस्‍तान को खतरनाक परमाणु और मिसाइल तकनीक दे रही थीं कंपनियां, भड़का अमेरिका, लगाया बैन

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वॉशिंगटन: अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने पाकिस्‍तान को खतरनाक परमाणु तकनीक देने के लिए कई पाकिस्‍तानी कंपनियों पर बैन लगा दिया है। अमेरिका ने कुल 24 कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाया है। अमेरिका ने कहा कि ये कंपनियां रूस को सैन्‍य या रक्षा उद्योग को मदद कर रही थीं। साथ ही वे पाकिस्‍तान के परमाणु गतिविधियों या ईरान की एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी को मदद दे रही थी। बाइडन प्रशासन ने कहा कि ये कंपनियां पाकिस्‍तान के असुरक्षित परमाणु कार्यक्रम को सामानों की आपूर्ति कर खतरा पैदा कर रही थीं।

इन कंपनियों पर पाकिस्‍तान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल तकनीक के प्रसार से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का खतरा है। पाकिस्‍तान में संदिग्‍ध गतिवधियों में शामिल किसी भी कंपनी ने अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अमेरिका के इस ऐलान से पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को झटका लगा है जो पाकिस्‍तान की परमाणु ताकत को बढ़ा रहे हैं। अमेरिका के कामर्स डिपार्टमेंट ने कहा कि जिन कंपनियों पर अमेरिका ने बैन लगाया है, वे लाटव‍िया, पाकिस्‍तान, रूस, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड की हैं। इन्‍हें अमेरिका की राष्‍ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति की चिंताओं को देखते हुए प्रतिबंधित किया गया है।
Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

एक्‍यू खान ने उत्‍तर कोरिया को दी थी परमाणु तकनीक

अमेरिका ने यूक्रेन में भीषण हमले कर रहे रूस की मदद करने वाली कंपनियों पर भी बैन लगा दिया है। इनमें लाटविया की फाइबर ऑप्टिक सॉल्‍यूशन भी शामिल है जो रूस को उपकरणों की आपूर्ति करती है। अमेरिका ने रूसी सेना की मदद करने वाली कंपनियों को दंडित करने के लिए एक्‍सपोर्ट कंट्रोल नीति बनाई है। इन कंपनियों को अब अमेरिकी उपकरणों की खरीद में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि पाकिस्‍तान की परमाणु तस्‍करी का इतिहास रहा है।

यही वजह है कि अमेरिका समेत पश्चिमी देशों में पाकिस्‍तान को बहुत संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। पाकिस्‍तान के परमाणु वैज्ञानिक एक्‍यू खान ने उत्‍तर कोरिया और लीबिया को परमाणु तकनीक की तस्‍करी की थी। जब इस खतरनाक मामले का खुलासा हुआ तो पाकिस्‍तानी परमाणु बम के जनक एक्‍यू खान को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया था। पाकिस्‍तान ने परमाणु तकनीक देकर उत्‍तर कोरिया से मिसाइल तकनीक खरीदी थी ताकि भारत के खिलाफ अपनी तैयारी को मजबूत किया जा सके।



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China Lockdown Jinping: शी जिनपिंग का तख्‍तापलट कर सकती थी चीनी जनता? क्रूर जीरो कोविड नीति में दी ढील तो उठे सवाल

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बीजिंग: चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने जीरो कोविड नीति के तहत लागू सख्‍त नियमों में ढील देने का फैसला कर दिया है। जीरो कोविड नीति के खिलाफ चीन के कई हिस्‍सों में बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इन प्रदर्शनों में छात्रों की संख्‍या हैरान करने वाली थी। छात्र, अपने उस राष्‍ट्रपति से पद छोड़ने की मांग कर रहे थे जो अजीवन शासन का सपना पाल रहा है। चीन मामलों के जितने भी विशेषज्ञ थे, वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि प्रदर्शन इस हद तक एतिहासिक हो रहे हैं कि ये तियानमेन स्‍क्‍वॉयर की याद दिला रहे हैं। अप्रैल 1989 में हुआ तियानमेन आज भी एतिहासिक प्रदर्शनों में शामिल है। विशेषज्ञों की मानें तो कोविड नीति में ढील के फैसले को राहत के तौर पर तो देखना ही चाहिए। साथ ही साथ इन्‍हें जिनपिंग की एक कमजोरी के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।

जिनपिंग से नाराज छात्र
बीजिंग, शंघाई और ऐसे कई शहरों में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। जीरो कोविड नीति को लेकर दंगे हो रहे थे और जनता का गुस्‍सा बढ़ता जा रहा था। ऐसे में जिनपिंग का झुकना लाजिमी था। पूर्व राजनयिक और ‘चाइना कूप’ के लेखक रोजर गारसाइड की मानें तो जिनपिंग का शासन इतने बड़े स्‍तर पर हो रहे प्रदर्शनों की वजह से खत्‍म होने की कगार पर आ गया था।

लगातार प्रदर्शनों की वजह से उन पर दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में सीनियर रैंक्‍स पर मौजूद दूसरे नेता भी उनके खिलाफ विद्रोह कर सकते थे। गारसाइड ने कहा है कि कोविड नीति में ढील को जिनपिंग की कमजोर नस के तौर पर देखा जाएगा। न सिर्फ उनकी पार्टी के नेता बल्कि अब देश और विदेश में मौजूद चीनी नागरिक भी उन्‍हें कमजोर नेता के तौर पर देखेंगे। उनका कहना है कि जिनपिंग को जीरो कोविड नीति का मास्‍टरमाइंड माना जाता है।
हिंसक प्रदर्शनों के बाद झुका चीन, क्रूर जीरो कोविड नीति में दी ढील, दुनिया के लिए खतरनाक है जिनपिंग का ऐलान!
नियमों में ढील

चीन ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों में कई ढील देने की घोषणा की है। इसमें लॉकडाउन के नियमों को पूरे जिले या इलाके के बजाय किसी इमारत या उसकी विशेष मंजिल पर लागू किए जाने का नियम शामिल है। नए नियमों के तहत कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले लोग अस्पतालों में भर्ती होने के बजाय घर पर ही क्‍वारंटाइन में रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, वहां ऑफलाइन क्‍लासेज शुरू हो सकेंगी। ये रियायतें सख्त ‘जीरो कोविड’ नीति को लेकर चीन के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में तीन साल से लागू इन प्रतिबंधों के चलते आम जनजीवन, यात्रा और रोजगार प्रभावित हुआ है, साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है।

जिनपिंग पर था दबाव
नए नियमों के तहत कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले लोग अस्पतालों में भर्ती होने के बजाय घर पर ही क्‍वारंटाइन में रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, वहां ऑफलाइन क्‍लासेज शुरू हो सकेंगी। जीरो कोविड नीति ने दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति चीन में आम जनजीवन को रोक दिया था। एतिहासिक प्रदर्शनों की वजह से जिनपिंग पर दबाव बढ़ता ही जा रहा था। साथ ही अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी इनका असर नजर आने लगा था।

जहां कुछ प्रतिबंध कायम रहेंगे तो कुछ हटा लिए गए हैं। नए ऐलान के बाद रोजाना की गतिविधियों जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करना के लिए कोविड-19 के निगेटिव टेस्‍ट की जरूरत अब नहीं होगी। साथ ही बड़े पैमाने पर टेस्टिंग को भी रोक दिया गया है। कुछ शहरों में कुछ कड़े नियम हटाए जा रहे हैं। जहां नियमों में ढील आम जनता के लिए राहत की बात है तो कुछ विशेषज्ञों इससे घबराहट हो रही है।
अमेरिका से किनारा और जिनपिंग का शाही स्‍वागत, आखिर क्‍या चाल चल रहे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान
संकट की तरफ है देश

गारसाइड का कहना है कि जीरो कोविड नीति में ढील सामाजिक और राजनीतिक संकट की तरफ इशारा करती है। वृद्धों के बीच कोविड वैक्‍सीनेशन में तेजी लाने की जरूरत है। उनकी मानें तो ढील की वजह से अगर देश में बड़े पैमाने पर मौत हुई तो फिर सामाजिक और राजनीतिक संकट बढ़ जाएगा। ऐसे में हो सकता है जिनपिंग को अपनी सत्‍ता तक छोड़नी पड़ी।

टला नहीं प्रदर्शन का खतरा
जीरो कोविड नीति में ढील के बाद अगर मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो फिर नए सिरे से प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे। माना जा रहा है कि कोविड नीति में ढील के बाद चीन में महामारी से होने वाली मौतों का खतरा कई गुना तक बढ़ गया है। झाहू जियातोंग जो गुआंगक्‍सी में स्थित सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुखिया हैं, उनका कहना है कि ढील के बाद चीन में 20 लाख लोगों की जान महामारी की वजह से जा सकती है।



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Pakistan Army India: बालाकोट… पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए खतरा बना भारत! परमाणु बम की बात क्यों कर रहे ना’पाक’ सैन्य एक्सपर्ट

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तानी सेना के मुखिया जनरल असीम मुनीर सत्‍ता संभालने के बाद ही भारत को गीदड़ भभकी देने में जुट गए हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि अगर भारत जंग शुरू करता है तो हम करारा जवाब देंगे। जनरल मुनीर चाहे जो भी धमकी दें लेकिन पाकिस्‍तानी सेना के ही विशेषज्ञ यह खुलकर मानने लगे हैं कि मोदी राज में भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्‍तानी सेना जुड़े रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट जैसी कार्रवाई‍यों ने भारत ने अब पाकिस्‍तान को अपने अस्तित्‍व को बचाने के लिए कठिन विकल्‍प चुनने को मजबूर कर दिया है।

पाकिस्‍तान की आजादी पर आयोजित इस्‍लामाबाद कान्‍क्‍लेव 2022 चर्चा में पाकिस्‍तान के पूर्व ज्‍वाइंट चीफ ऑफ स्‍टॉफ कमिटी रिटायर जनरल जुबैर हयात ने अपने भाषण में कहा कि भारत पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व को स्‍वीकार नहीं करता है और विभिन्‍न मोर्चों पर हमारे के लिए चुनौती पेश करता है। इस वजह से भारत का खतरा अभी खत्‍म नहीं हुआ है। जुबैर हयात ने कहा कि भारत के नेता भी 1947 के बंटवारे को ऐतिहासिक गलती मानते हैं। जुबैर ने भारत के सर्जिकल स्‍ट्राइक और साल 2019 में ऑपरेशन बालाकोट का भी जिक्र किया।
जनरल जुबैर ने कहा कि पाकिस्‍तान की धरती पर पहली बार हमला किया गया। उन्‍होंने ब्रह्मोस मिसाइल के दुर्घटनावश पाकिस्‍तान में गिरने का भी उल्‍लेख किया। बांग्‍लादेश के जन्‍म पर जनरल जुबैर की हताशा साफ झलकी। उन्‍होंने रिटायर जनरल बाजवा के उस बयान से अपनी सहमति जताई जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पूर्वी पाकिस्‍तान में हुई हार सेना के कारण नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं की वजह से हुई थी। बता दें कि जनरल बाजवा के बयान को खुद उन्‍हीं के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी खारिज कर चुके हैं।

पाकिस्‍तान के एयर यूनिवर्सिटी इस्‍ला‍माबाद में विशेषज्ञ डॉक्‍टर आदिल सुल्‍तान ने कहा कि विदेशी माहौल ऐसा है कि पाकिस्‍तान को आर्थिक संकट के बाद भी परमाणु और परंपरागत हथियारों पर अपना फोकस बरकरार रखना होगा। सुल्‍तान ने कहा कि भारत बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, एंटी सैटलाइट वेपन, हाइपरसोनिक मिसाइल, एक साथ कई परमाणु बम ले जाने वाली मिसाइल, पनडुब्‍बी से दागे जाने वाली मिसाइल जैसी नई तकनीक को शामिल कर रहा है। यह पाकिस्‍तान की प्रतिरोधक क्षमता की परेशानी को बढ़ाएगा। वहीं पाकिस्‍तानी लेखक जावेद जब्‍बार ने सलाह दी कि पाकिस्‍तान को अपनी जनसंख्‍या की बढ़त को कंट्रोल करने की जरूरत है।



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