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अब बादलों में घर बसाने का सपना होगा पूरा, दुबई में बन रही 100 मंजिला बिल्डिंग, दुनिया में सबसे बड़ी

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रियाद: दुबई में 100 मंजिला इमारत बनने की तैयारी हो चुकी है। यह इमारत न सिर्फ दुबई का एक आकर्षण होगी बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग भी होगी। जो बात सबसे दिलचस्‍प है, वह है कि बिल्डिंग रिहायशी होगी। आमतौर पर ऑफिस या फिर कर्मशियल बिल्डिंग्‍स इतनी ऊंची होती हैं। ऐसे में इस बिल्डिंग को आर्किटेक्‍चर का नायाब नमूना करार दिया जा रहा है। इस 100 मंजिला इमारत को बुर्ज बिनघाती जैकब एंड को रेजीडेंसेज की तरफ से तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञ इस मॉर्डन आर्किटेक्‍चर की प्रेरणा करार दे हे हैं। साथ ही वो यह भी कह रहे हैं कि यह बिल्डिंग आने वाले कई समय तक इंजीनियरों को बेहतर करने के लिए आइडिया देती रहेगी।

ऊंचाई की कोई जानकारी नहीं
अभी तक यह नहीं बताया गया है कि इस बिल्डिंग की ऊंचाई कितनी होगी लेकिन इसकी पहली झलक दुनिया को दिखा दी गई है। जो तस्‍वीरें सामने आई हैं, उससे साफ पता लग रहा है कि दुबई की सबसे बड़ी इमारत प्रिंसेज टॉवर से इसे साफ देखा जा सकता है। प्रिंसेज टॉवर की ऊंचाई 1289 फीट है। यह नई बिल्डिंग न्‍यूयॉर्क की 57वीं स्‍ट्रीट मैनहैट्टन स्थित सेंट्रल पार्क टॉवर के लिए खतरा बन सकती है। सेंट्रल पार्क टॉवर 98 मंजिला बिल्डिंग है जिसकी ऊंचाई 1550 फीट है।

बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड बरकरार
यह नई बिल्डिंग बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाएगी। बुर्ज खलीफा की ऊंचाई 2716 फीट है जिसमें कुछ कमर्शियल ऑफिसेज भी हैं। इस वजह से ही इसे रिहायशी इमारत में गिना नहीं जाता है। जैकब एंड को के चेयरमैन और क्रिएटिव डायरेक्‍टर जैकब अराबको का दावा है कि नई इमारत रीयल एस्‍टेट और लग्‍जरी की उस दुनिया को सामने लेकर आएगी जिसके बारे में कभी किसी ने नहीं सुना होगा। दोनों कंपनियों की तरफ से बिनघाती के सीईओ और आर्किटेक्‍चर के मुखिया मोहम्‍मद बिनघाती ने कहा है कि नई इमारत सौम्‍यता और सुंदरता का मिश्रण होगी। बिनघाती की मानें तो दोनों ही उनके ब्रांड्स हैं और कोशिश रहेगी कि पहले की सभी सीमाओं को तोड़ दिया जाए।

कब होगी पूरी

उन्‍होंने कहा, ‘जो बिनघाती ने रीएल एस्‍टेट में किया है, वह बहुत ही मुश्किल है। बिनघाती ने आर्किटेक्‍चर में द‍ुनिया को जिससे जो जैकब एंड को ने ज्‍वैलरी वर्ल्‍ड को नवाजा है।’ इस इमारत में घर लेने के लिए लोगों ने अपनी रूचि दिखानी शुरू कर दी है। यह प्रोजेक्‍ट कब पूरा होगा, इसकी कोई तारीख अभी तय नहीं की गई है। लेकिन माना जा रहा है कि दुबई में ही जारी वस्‍ल टॉवर के साथ इसे पूरा किया जाएगा जो साल 2024 में पूरी हो जाएगी।



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चीन में क्‍यों लग रहे हैं ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो’ के नारे, क्‍या जाने वाली है सबसे ताकतवर नेता की कुर्सी!

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बीजिंग: बीजिंग, शंघाई, उरुमकी, नानजिंग, गुआनझोहू, वुहान और चीन के कम से कम एक दर्जन शहरों में इस समय जनता सड़कों पर उतरी हुई है। राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग अपने तीसरे कार्यकाल का सपना संजो चुके हैं और मार्च 2023 में उनका यह सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन ये प्रदर्शन उनके लिए मुसीबत बन चुका है। कोविड-19 की वजह से देश में जो जीरो कोविड नीति लागू की गई है, उसे लेकर जनता का गुस्‍सा सांतवें आसमान पर पहुंच चुका है। जिनपिंग के खिलाफ नाराजगी सड़कों पर देखी जा सकती है। जनता ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो’ नारे लगा रही है। जिस कोविड को लेकर गुस्‍सा अमेरिका से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक में नजर आ रहा था, वही अब चीन में भी नजर आने लगा है। कोविड केसेज भले ही कुछ कम हुए हों मगर इसके बाद भी लॉकडाउन की वजह से नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वुहान में हालात मुश्किल
जिस वुहान से कोविड की शुरुआत हुई थी, वहां का नजारा जिनपिंग और उनके प्रशासन को चौंका सकता है। यहां पर प्रदर्शनकारी चिल्‍ला रहे हैं, ‘यह वुहान से शुरू हुआ था और यहीं पर खत्‍म होगा।’ नाराज जनता ने लोहे की बैरीकेडिंग तक को तोड़ दिया, कोविड टेस्‍ट कराने से मना कर दिया और यहां तक लॉकडाउन को खत्‍म करने की मांग तक कर डाली। दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस का पहला केस वुहान में ही मिला था। यहां से यह पूरी दुनिया में पहुंचा और अब तक इसका असर देखा जा सकता है।

जीरो कोविड नीति की वजह से देश के बिजनेस ठप पड़े हैं और परिवारों को कई हफ्तों तक आइसोलेशन में रखा जा रहा है। इनका कहना है कि खाना भी सीमित मात्रा में मिल रहा है और दवाईयां भी ठीक से नहीं मिल रही हैं। पूरी दुनिया में जहां अब लोगों के लिए जीवन आसान हो रहा है तो वहीं चीन की जनता को कोविड के कारण कड़े प्रतिबंधों से गुजरना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों पर मिर्च का स्‍प्रे

सत्‍ताधारी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के खिलाफ जनता की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। चीन के लोगों का मानना है कि जिनपिंग और उनकी सरकार को न तो लॉकडाउन के आर्थिक पहलू की चिंता और न ही उन्‍हें इसकी मानवीय कीमत का कोई अंदाजा है। शंघाई में तो पुलिस ने हद ही कर दी। यहां पर 300 लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने काली मिर्च का स्‍प्ने तक यूज किया। यहां पर जनता नारे लगा रही थी, ‘जिनपिंग गद्दी छोड़ो, कम्‍युनिस्‍ट पार्टी गद्दी छोड़ो।’ इसके साथ ही लोग चिल्‍ला रहे थे, ‘शिनजियांग को अनलॉक करो, चीन को अनलॉक करो,’ ‘पीसीआर टेस्‍ट नहीं चाहिए, प्रेस की आजादी चाहिए।’
चीन में टूटा सब्र का बांध‍! कोरोना केस 30 हजार के पार लेकिन मंजूर नहीं लॉकडाउन, सड़कों पर भारी प्रदर्शन
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारियों की भीड़ बढ़ती गई, पुलिस के साथ हिंसा भी बढ़ गई। उरुमकी से सामने आए एक व‍ीडियो में लोगों को कहते हुए सुना जा सकता है, ‘कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को हटाओ, जिनपिंग को हटाओ।’ पिछले हफ्ते उरुमकी के एक अपार्टमेंट में आग लगने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस अपार्टमेंट में आंशिक लॉकडाउन लगा था। यहां पर कड़े कोविड नियमों की वजह से राहत और बचाव कार्य मुश्किल हो रहा था। इस घटना के बाद से जनता काफी भड़क गई थी।

केसेज में तेजी से इजाफा
रविवार को चीन में 39791 केसेज आए हैं। यह लगातार चौथा दिन है जब कोविड के केसेज इतने बढ़े हैं। एक दिन पहले ही यानी शनिवार को 35,183 केसेज आए थे। चीन की राजधानी बीजिंग और कई बड़े शहरों में संक्रमण को रोकने के लिए कड़ी मशक्‍कत करनी पड़ रही है। बीजिंग में पिछले हफ्ते की तुलना में केसेज में 66 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। चीन में इतने बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन आम बात नहीं है। कई नागरिक अब सोशल मीडिया में आकर अपना गुस्‍सा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर चीन ने सबसे ज्‍यादा प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन अब इस प्‍लेटफॉर्म पर भी नियंत्रण करने में मुश्किल आ रही है।



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‘शी जिनपिंग पद छोड़ो’, चीन में टूटा लोगों के सब्र का बांध! जानिए वजह

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चीन में लोगों का विरोध प्रदर्शन

बीजिंग: चीन में कोरोना वायरस के मामले थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसके चलते यहां सख्त जीरो कोविड पॉलिसी लागू है। कोरोना का प्रसार रोकने के लिए चीन में लॉकडाउन, बड़े स्तर पर टेस्टिंग और यात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। कोरोना के मामले के तीसरे साल में जाने के बीच चीन में एक के बाद एक पाबंदियों और सख्त गाइडलाइंस ने लोगों को थका दिया है और गुस्से में भी भर दिया है। चीन सरकार की सख्त कोविड पाबंदियों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘सख्त जीरो कोविड पॉलिसी’ के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

प्रदर्शनकारियों को पुलिस की कारों में बांधा


शंघाई में हजारों प्रदर्शनकारी निकले, जहां लोगों को पुलिस की कारों में बांध दिया गया। छात्रों को बीजिंग और नानजिंग समेत अन्य जगहों पर विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन करते देखा गया। चीन में शनिवार को 34,398 कोरोना केस सामने आए। शुक्रवार को यह आंकड़ा 31,928 था जो संक्रमण के मामलों में आए हालिया उछाल को दिखाता है।

china covid

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प्रदर्शनकारी

जिनपिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सुदूर उत्तर-पश्चिम शहर उरुमकी में एक विरोध प्रदर्शन के बाद अशांति फैली है, जहां एक टावर ब्लॉक में आग लगने से 10 लोगों की मौत के बाद लॉकडाउन नियमों को दोष दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि चीनी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि कोविड प्रतिबंधों के कारण मौतें हुईं, लेकिन उरुमकी में अधिकारियों ने शुक्रवार देर रात माफी मांगी और कोविड पाबंदियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर ‘व्यवस्था बहाल’ करने का वादा किया।

शी जिनपिंग पद छोड़ो, कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो जैसे नारे लगे

शनिवार रात शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को खुलेआम ‘शी जिनपिंग, पद छोड़ो’ और ‘कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना गया। लोगों को खाली बैनर पकड़े देखा गया, जबकि अन्य लोगों ने उरुमकी में पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए मोमबत्तियां जलाईं और फूल चढ़ाए। बता दें कि इस तरह की मांगें चीन के भीतर एक असामान्य दृश्य हैं, जहां सरकार और राष्ट्रपति की किसी भी सीधी आलोचना के परिणामस्वरूप कठोर दंड दिया जा सकता है।

china covid

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प्रदर्शनकारी

कोविड प्रतिबंधों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन

सरकार विरोधी नारों का नेतृत्व करने वाले प्रदर्शनकारियों को ले जाया गया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में धक्का भी दिया। स्नैप लॉकडाउन ने पूरे देश में गुस्सा पैदा कर दिया है और कोविड प्रतिबंधों की वजह से झेंग्झौ से ग्वांगझू तक हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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पाकिस्तानी सेना ने जनरल बाजवा की संपत्ति को लेकर खबरों पर तोड़ी चुप्पी, वेबसाइट के दावों को बताया ‘झूठा’

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इस्लामाबाद : पाकिस्तानी सेना ने रविवार को मीडिया की इन खबरों को खारिज कर दिया कि निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के परिवार के सदस्य और रिश्तेदार उनके छह साल के कार्यकाल के दौरान अरबपति बन गए। सेना ने इन खबरों को ‘भ्रामक’ और ‘घोर झूठ तथा दुर्भावनापूर्ण’ बताया। जनरल बाजवा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्हें तीन साल का सेवा विस्तार मिला था। फैक्टफॉकस वेबसाइट पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, जनरल बाजवा (61) के परिवार के कथित कर रिकॉर्ड, (देश-विदेश में) उनकी (सेना प्रमुख की) संपत्तियों और कारोबार की मौजूदा बाजार कीमत 12.7 अरब रुपए है।

रविवार को आखिरकार सेना ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उसके कुछ दिन पहले शहबाज शरीफ सरकार ने जनरल बाजवा तथा उनके परिवार के सदस्यों के कर रिकॉर्ड लीक करने में शामिल दो अधिकारियों को सेवा से निलंबित कर दिया और मामले की जांच शुरू की थी। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ ने कहा कि सेना प्रमुख जनरल बाजवा और उनके परिवार की संपत्तियों से जुड़े भ्रामक आंकड़े सोशल मीडिया पर साझा किए गए और कल्पना पर आधारित आंकड़े विभिन्न मंचों पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए। सेना के बयान में कहा गया है, ‘यह पूरी तरह झूठ तथा दुर्भावना पर आधारित है।’

नए आर्मी चीफ मुनीर से इमरान बेचैन लेकिन लूट मचाकर भी बाजवा बमबम! समझिए माजरा क्या है
सेना ने बयान में क्या कहा?
इसमें कहा गया है कि जनरल बाजवा, उनकी पत्नी और परिवार के बाकी सदस्यों की संपत्ति संघीय राजस्व बोर्ड को घोषित की गई है। बयान के अनुसार, यह ‘झूठी धारणा’ बनाई जा रही है कि ये संपत्तियां जनरल बावजा के बेटे के ससुर ने उनके छह साल के कार्यकाल के दौरान अर्जित की। सेना का कहना है कि सेना प्रमुख और उनका परिवार नियमित तौर पर कर रिटर्न भरते हैं। बयान में कहा गया है, ‘हर नागरिक की तरह सेना प्रमुख और उनके परिवार भी अपनी संपत्तियों को लेकर कर प्रशासन के प्रति जवाबदेह हैं।’

वेबसाइट ने जारी की 2013 से 2021 तक की जानकारी
फैक्टफॉकस वेबसाइट ने अपने पेज पर 2013 से 2021 तक जनरल बाजवा और उनके परिवार के कथित संपत्ति ब्योरे को साझा किया है। यह वेबसाइट अपने को ‘आंकड़े के आधार खोजी पत्रकारिता करने वाला पाकिस्तान आधारित डिजीटल मीडिया समाचार संगठन’ बताती है। खबर में दावा किया गया है कि जनरल बाजवा की पत्नी आयशा अमजद की संपत्ति 2016 के शून्य से बढ़कर छह वर्ष में 2.2 अरब रुपये हो गयी है। उसने कहा कि इनमें सेना द्वारा उनके पति को दिए रिहायशी प्लॉट, वाणिज्यिक भूखंड और मकान की कीमत शामिल नहीं है।



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