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अनहोनी के डर से जैसे-तैसे शादी निपटाना चाहते हैं जगदानंद; 2023 में तेजस्वी यादव को CM बनाने पर बोले उपेंद्र कुशवाहा

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बिहार में दो महीने से भी कम पुरानी नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर दो प्रमुख दल आरजेडी और जेडीयू के नेता भिड़ गए हैं। मामला आगे बढ़ेगा या शांत हो जाएगा, पता नहीं, लेकिन तेजस्वी यादव को 2023 में नीतीश मुख्यमंत्री बनाएंगे, ये कहकर राष्ट्रीय जनता दल के फिर से प्रदेश अध्यक्ष बने जगदानंद सिंह ने माहौल गरमा दिया है। इसके जवाब में जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी संभावना को नकारने का संकेत देते हुए कहा है कि जगदानंद सिंह अनहोनी के डर से जैसे-तैसे शादी कराना चाहते हैं।

असल में जगदानंद सिंह ने गुरुवार को दोपहर में कहा- नीतीश कुमार की घोषणा के अनुसार (ऐसी कोई घोषणा सार्जवनिक रूप से नहीं की गई है) हमें लगता है कि 2022 बीतने के बाद 2023 में नीतीश देश की लड़ाई लड़ेंगे और बिहार के भविष्य की लड़ाई तेजस्वी यादव के हाथ में सौंप देंगे। 

जब उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या नीतीश सीएम पद तेजस्वी को सौंप देंगे तो जगदानंद ने कहा- और क्या, प्रसासनिक ओहदा तो वही है ना। हमारी कार्यपालिका की शक्ति मुख्यमंत्री में निहित है। मुख्यमंत्री ही अपने राज्य को आगे ले जाने का जिम्मेवार व्यक्ति होता है। देश इंतजार कर रहा है नीतीश का और बिहार इंतजार कर रहा है तेजस्वी का। 

तेजस्वी यादव 2023 में CM बनेंगे, बिहार RJD अध्यक्ष जगदानंद सिंह बोले- देश नीतीश का इंतजार कर रहा है

जगदानंद सिंह के बयान के बाद बीजेपी प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा था कि राजद 2023 तक नीतीश कुमार को टिकने नहीं देगी, उससे पहले ही उनको निपटा देगी। सुशील कुमार मोदी समेत बीजेपी के कई नेता यह लगातार आरोप लगा रहे हैं कि आरजेडी नीतीश को जल्द ही बेदखल करके तेजस्वी को सीएम बनाएगी। यह ऐसी बात है जिसे लालू यादव या तेजस्वी यादव ने गलत बताया है।  

बुधवार को आरजेडी अध्यक्ष के चुनाव के दौरान राजद सुप्रीमो लालू यादव ने कहा था कि वो चाहते हैं कि तेजस्वी सीएम बनें लेकिन जब उनसे पूछा गया कि कब बनेंगे तो उन्होंने कोई टाइमलाइन या डेडलाइन देने के बदले ये कहा कि समय आएगा तो बन जाएंगे। 

नीतीश दिल्ली संभालें, तेजस्वी यादव बिहार: सुनिए लालू यादव ने दिया क्या जवाब

आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह बहुत वरिष्ठ नेता हैं और लालू यादव के मनाने पर फिर से पार्टी का चुनाव लड़ने को राजी हुए थे। उनके बयान की गंभीरता है इसलिए जेडीयू से जवाब सीधा या तीखा नहीं आया है। जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है- जगदा बाबू का बयान उस पिता के एक्शन की तरह है जो किसी अनहोनी के भय से अपने बेटा या बेटी की शादी जैसे-तैसे निपटा लेना चाहता है।

कुशवाहा अपने बयान में किस अनहोनी की आशंका जता रहे हैं, ये साफ नहीं है। अनहोनी का मतलब आने वाले दिनों में सीबीआई केस में तेजस्वी यादव की गिरफ्तारी की आशंका से है या फिर आरजेडी और जेडीयू के संबंधों में कुछ ऊंच-नीच से है, ये कुशवाहा को ही पता होगा। लेकिन गठबंधन सरकार के दो महीने पूरे होने से पहले ही आरजेडी ने तेजस्वी यादव को सीएम बनाने की बेचैनी उजागर कर दी है।

 



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IND vs AUS : रोहित शर्मा इतिहास रचने की दहलीज पर, टीम इंडिया के लिए करेंगे ऐसा कारनामा

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Image Source : GETTY
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IND vs AUS Rohit Sharma Century : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होने में अब कुछ ही वक्त बाकी है। नागपुर के विदर्भ क्रिकेट ग्राउंड पर नौ फरवरी से पहला मुकाबला शुरू होगा। सीरीज शुरू होने में अब मात्र तीन ही दिन का वक्त शेष है, इसलिए दोनों टीमों की तैयारियों ने और भी जोर पकड़ लिया है। टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट ​कमिंस पहली बार बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में अपनी अपनी टीम के लिए कप्तानी करते हुए नजर आएंगे। इस बीच रोहित शर्मा एक और नया कीर्तिमान रचने के मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं। अगर चार टेस्ट मैचों की आठ पारियों में से एक भी बार रोहित शर्मा के बल्ले से भरपूर रन आए तो वे ऐसा इतिहास रच देंगे, जो इससे पहले भारतीय क्रिकेट में कभी नहीं हुआ। चलिए आपको बताते हैं कि वो कीर्तिमान आखिर है क्या और उसके लिए रोहित शर्मा को करना क्या होगा। 

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रोहित शर्मा बन सकते हैं तीनों फॉर्मेट में बतौर कप्तान शतक लगाने वाले खिलाड़ी 

रोहित शर्मा वैसे तो टीम इंडिया के काफी पुराने कप्तान हैं और कई साल से तीनों फॉर्मेट खेल रहे हैं। इस बीच जब विराट कोहली तीनों फॉर्मेट की कप्तानी कर रहे थे, उस वक्त बीच बीच में रोहित शर्मा को कप्तानी करने का मौका मिला, लेकिन वे रेगुलर कप्तान नहीं रहे। पिछले करीब डेढ़ साल से रोहित शर्मा नियमित कप्तान हैं। लेकिन पिछले साल के आखिर में जब टीम इंडिया बांग्लादेश के दौरे पर गई थी, तब भी अचानक चोटिल होकर रोहित शर्मा को सीरीज से बाहर होना पड़ा, इसके बाद कप्तानी की जिम्मेदारी केएल राहुल ने संभाली और उपकप्तान चेतेश्वर पुजारा बन गए थे। लेकिन अब रोहित शर्मा लगातार चार मैचों में कप्तानी करते हुए नजर आएंगे। इस बीच रोहित शर्मा भारत के पहले ऐसे कप्तान बन सकते हैं, जिन्होंने बतौर कप्तान तीनों फॉर्मेट में शतक लगाया है, ये काम आज तक भारत की ओर से कोई भी खिलाड़ी नहीं कर पाया है। पूर्व कप्तान विराट कोहली ने टेस्ट और वनडे में तो कप्तान के तौर पर खूब शतक लगाए, लेकिन टी20 इंटरनेशनल में उनके बल्ले से शतक नहीं आया था। एशिया कप 2022 में उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ पहली टी20 इंटरनेशनल सेंचुरी लगाई, लेकिन तब वे कप्तान नहीं थे। वैसे बतौर कप्तान तीनों फॉर्मेट में श​तक लगाना कितना मुश्किल काम है, ये बात इसी से समझी जा सकती है कि अब तक दुनिया के तीन ही कप्तान ऐसा करने में कामयाब हो पाए हैं। पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम, दक्षिण अफ्रीका के कप्तान रहे फॉफ डुप्लेसी और श्रीलंका के कप्तान रहे तिलकरत्ने दिलशान। अब रोहित शर्मा के पास मौका है कि वे इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराएं। 

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रोहित शर्मा करीब पांच महीने बाद कर रहे हैं टेस्ट क्रिकेट में वापसी 
रोहित शर्मा ने वैसे तो अभी तक 45 टेस्ट मैच खेले हैं और इसमें उनके नाम आठ शतक दर्ज हैं, वहीं उन्होंने 14 अर्धशतक भी लगाए हैं। लेकिन कप्तान के तौर पर एक भी नहीं है। रोहित शर्मा ने आखिरी टेस्ट शतक दो सितंबर 2021 को इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में लगाया था, तब पहली पारी में उनके बल्ले से ​केवल 11 रन निकले, लेकिन दूसरे मैच में उन्होंने 127 रनों की पारी खेली थी, लेकिन तब विराट कोहली टीम इंडिया के कप्तान हुआ करते थे। इसके बाद रोहित शर्मा ने दो ही टेस्ट और खेले हैं। चार सितंबर 2022 को मोहाली में श्रीलंका के खिलाफ और इसके बाद बेंगलोर में श्रीलंका के ही खिलाफ, इन दोनों मैचों में कप्तान रोहित शर्मा थे, लेकिन उनके बल्ले से शतक तो दूर, अर्धशतक भी नहीं आया है। अब करीब पांच महीने बाद रोहित शर्मा बतौर कप्तान एक बार फिर से मैदान में उतरने वाले हैं, देखना होगा कि इस सीरीज में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है।

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अडानी पर कांग्रेस को मिला 16 दलों का साथ, लोकसभा और राज्यसभा फिर से ठप

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विपक्षी दल चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। अडानी मामले पर विपक्ष के 16 दल एकजुट दिख रहे हैं।



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भारतीय बाजार में लिस्टेड अडानी ग्रुप के शेयरों को ‘शॉर्ट’ करना आसान नहीं, यहां जानें वजह

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अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है.

नई दिल्ली:

अमेरिकी फाइनेंशियल रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. यह एजेंसी खुद को ‘शॉर्ट सेलर’ बताती है और इसके जरिये तगड़ा मुनाफा कमाती है. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) कंपनी अपनी रिपोर्ट्स और शॉर्ट सेलिंग के जरिये कई कंपनियों के शेयर्स गिरा चुकी है. कंपनी का दावा है कि उसके पास इस तरह के निवेश को लेकर दशकों का अनुभव है. हिंडनबर्ग रिसर्च एक अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म है, जो कंपनियों के शेयर गिराकर मुनाफा कमाने के लिए उसके खिलाफ कई तरह के रिपोर्ट जारी करती है.

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हाल में हिंडनबर्ग रिसर्च ने हाल में अडानी ग्रुप (Adani Group) के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की. हालांकि, अडानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट को निराधार बताया है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई है.  हिडनबर्ग रिसर्च  केवल एक रिसर्च फर्म नहीं बल्कि एक ‘शॉर्ट सेलर फर्म है, जो इस तरह के दांव चलकर मुनाफा कमाने की कोशिश करती रहती है.

BQ प्राइम की रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रुप की कंपनियों को शॉर्ट करना आसान नहीं है. भारतीय-सूचीबद्ध संस्थाओं के पास अपेक्षाकृत कम फ्री फ्लोट और कुछ संस्थागत निवेशक हैं, जिसका मतलब है कि छोटे विक्रेताओं के लिए उधार लेने के लिए शेयरों की कमी है, और इसलिए वे अधिक महंगे हैं. ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से नौ शेयरों में संस्थापकों और नियंत्रित शेयरधारकों की कम से कम 60% हिस्सेदारी है. 

भारत में शॉर्ट सेलिंग पर कई तरह से नियंत्रित किए गए हैं. हालांकि, यह फैक्ट है कि अडानी के शेयरों में  शॉर्ट सेलिंग भी कम हुई. अमूमन शॉर्ट सेलिंग होने पर शॉर्ट कवरिंग शेयरों को और नीचे जाने से रोक देती है. पिछले हफ्ते शॉर्ट-सेलिंग स्पेशलिस्ट स्कॉर्पियन कैपिटल पार्टनर्स ने एक ट्वीट में कहा, “मजेदार विडंबना यह है कि अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर गिर रहे हैं या आंशिक रूप से नीचे आ हैं, क्योंकि भारत में शॉर्ट सेलिंग करना काफी मुश्किल है.”


 



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