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अधिग्रहण और विलय से मिल रही अस्पताल क्षेत्र के विस्तार को रफ्तार

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सोहिनी दास / मुंबई 11 18, 2022






पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल क्षेत्र में विलय और अधिग्रहण गतिविधियों ने हलचल बढ़ा दी है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि इस रुझान के अभी जारी रहने की संभावना है। विश्लेषकों और अस्पताल संचालकों दोनों का मानना है कि विलय और अधिग्रहण गतिविधियां बाजार में जाने के समय को काफी कम कर देती है और कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में तत्काल बाजार हिस्सेदारी और पहुंच प्रदान करती है। नए अस्पताल की निर्माण परियोजना में आमतौर पर 3-4 साल का समय लगता है।  

बेंगलूरु स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स कुछ समय पहले से ही अधिग्रहण की संभावनाओं की तलाश कर रहा था। उसने 2018 में फोर्टिस अस्पताल के अधिग्रहण के लिए बोली भी लगाई, लेकिन मलेशिया के आईएचएच ने फोर्टिस का अधिग्रहण किया। मणिपाल हॉस्पिटल्स नरेश त्रेहन के मेदांता-द मेडीसीटी के अधिग्रहण की दौड़ में भी शामिल था, लेकिन उसने अंत में 5,800 करोड़ रुपये में मेदांता को खरीदने के अपने निर्णय को टाल दिया। क्योंकि उसने मेदांता की कीमत एबीटा के 26 गुना आंकी थी।    

हालांकि 2020 में मणिपाल हॉस्पिटल्स ने कोलंबिया एशिया को लगभग 2,100 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके साथ ही मणिपाल हॉस्पिटल्स देश में अपोलो के बाद दूसरी सबसे बड़ी अस्पताल श्रृखंला बन गया। वह यहीं पर नहीं रुका, पिछले साल जून में मणिपाल हॉस्पिटल्स ने बेंगलूरु के विक्रम हॉस्पिटल का 350 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया। अब उसने कोलकाता के ईमामी समूह के एमरी हॉस्पिटल का 1,500 करोड़ में अधिग्रहण करने के लिए बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी समय वह रायपुर में एक नया अस्पताल बनाने के लिए काम शुरू कर चुका है। 

मणिपाल हॉस्पिटल्स के पास लगभग 8,000 विस्तरों की क्षमता है और वह आरंभिक सार्वजनिक निगम (आईपीओ) लाने की संभावनाओं का आकलन कर रही है। मणिपाल हॉस्पिटल्स लगातार देशभर में अपना विस्तार करना चाहती है।    

मणिपाल हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दीलिप जोस ने बताया कि देश में हमेशा विस्तरों और गुणवत्तापूर्ण इलाज की मांग रहती है। जब हम एक नई जगह में प्रवेश करना चाहते हैं, तो स्थानीय अस्पतालों के अधिग्रहण का मार्ग सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि यह बाजार, डॉक्टरों और रोगियों के लिए तैयार पहुंच प्रदान करता है।

अगर मुझे ऐसे बाजार में विस्तार पर विचार करना है, जहां मेरी पहले से ही महत्वपूर्ण उपस्थिति है, तो मैं नए अस्पताल के विस्तार का विकल्प चुन सकता हूं क्योंकि मैं उस क्षेत्र के भीतर सूक्ष्म बाजार को अच्छी तरह जानता हूं। विश्लेषक भी इससे सहमत है। आईसीआरए की उपाध्यक्ष और सेक्टर प्रमुख मैत्री माचेरला के अनुसार स्थानीय अस्पतालों का अधिग्रहण एक निश्चित भूगोल में तत्काल बाजार हिस्सेदारी देता है। 

क्रिसिल रेंटिग के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेट्ठी बताते हैं कि कुछ छोटे अस्पतालों को कोविड -19 के दौरान नुकसान उठाना पड़ा और उनमें से कुछ बिक्री या रणनीतिक साझेदारी के लिए तैयार हो सकते हैं।



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नवंबर में कोयला आयात 10 माह नीचे

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रॉयटर्स / कोलकाता 12 09, 2022






भारत के थर्मल कोयले का आयात नवंबर में 10 माह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुख्य रूप से घरेलू कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है। कोलमिंट के आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर महीने में भारत में 108.3 लाख टन थर्मल कोयले का आय़ात हुआ है, जबकि अक्टूबर में 120.3 लाख टन और नवंबर 2021 में 94.5 लाख टन कोयले का आयात हुआ था।

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आयात में कमी आई है, जिसकी भारत के कुल कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विश्व की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी के उत्पादन में छठे हिस्से की बढ़ोतरी हुई है और वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में यह 4,126 लाख टन हो गया है। 2010 के बाद पहली बार सालाना उत्पादन का लक्ष्य हासिल हो सका है।

 ईंधन की मांग 10.2 प्रतिशत बढ़ी

भारत में ईंधन की मांग नवंबर महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.2 प्रतिशत बढ़ी है। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एलॉलिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में खपत 188.4 लाख टन रही है।

पेट्रोल की बिक्री 8.1 प्रतिशत बढ़कर 28.6 लाख टन रही है। रसोई गैस या तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री 5.2 प्रतिशत बढ़कर 24.7 लाख टन हो गई है. वहीं नेफ्था की बिक्री 18.2 प्रतिशत गिरकर 10.1 लाख टन रह गई है।

सड़क बनाने के काम आने वाले बिटुमिन की बिक्री 30.3 प्रतिशत बढ़ी है। 



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गेहूं का रकबा पिछले साल से 25 फीसदी बढ़ा

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पिछले साल की तुलना में इस बार 9 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गेहूं का रकबा 25 फीसदी तक बढ़ गया है। किसानों ने बेहतर रिटर्न की उम्मीद में अधिक क्षेत्र में इस बार फसल की बोआई की है। व्यापारियों को उम्मीद है कि रिकॉर्ड उच्च कीमतें और अगले कुछ महीनों में सरकारी भंडारों में घटते स्टॉक और निजी व्यापारियों के उत्साह के कारण बाजार गेहूं के लिए अनुकूल रहेगा। 

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक गेहूं की बोआई 2.55 करोड़ हेक्टेयर में की गई है। पिछले साल समान अवधि में 2.03 करोड़ हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की गई थी। कुल मिलाकर, आमतौर पर गेहूं लगभग 3.0-3.1 करोड़ हेक्टेयर भूमि में बोया जाता है। हालांकि, उत्तर भारत में अब तक सामान्य से कम सर्दी और दिन के समय तापमान में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष उत्तर भारत में सामान्य सर्दियों की तुलना में मौसम गर्म रहने का अनुमान जताया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार गेहूं को बढ़ते चरणों के दौरान दिन में लगभग 14-15 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, लेकिन अगर यह इससे अधिक गर्म होता है तो उपज कम होने की आशंका बढ़ जाती है। 

व्यापारियों को भरोसा है कि कुल रकबा पिछले वर्षों की तुलना में 10-15 फीसदी अधिक होगा, लेकिन क्या यह बम्पर फसल में तब्दील होता है, यह जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर करता है। पिछले साल, कटनी से ठीक पहले तापमान में अचानक वृद्धि के कारण गेहूं उत्पादन काफी गिर गया था।



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तकनीकी बदलाव के उपयुक्त नहीं पुरानी व्यवस्थाः डिप्टी गवर्नर

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सुब्रत पांडा / मुंबई 12 09, 2022






भारतीय रिजर्व बैंक  के डिप्टी गवर्नर एमके जैन ने कहा कि बैंक की परंपरागत कोर बैंकिंग प्रणाली (सीबीएस) मोबाइल के पहले के दौर में विकसित की गई थी और संभवतः वह प्रोडक्ट डिजाइन, गणना की क्षमता, एपीआई इंटीग्रेशन के हिसाब से त्वरित बदलाव के अनुकूल नहीं है। जैन ने कहा कि ऐसे में इन इकाइयों को टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, जिससे बदलते वक्त के मुताबिक तालमेल बिठाया जा सके। 

नैशनल इंस्टीट्यूट फॉर बैंकिंग स्टडीज ऐंड  कॉरपोरेट मैनेजमेंट (निब्सकॉम) में अपने भाषण में जैन ने कहा बैंक और वित्त संस्थानों को निरंतर नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले गतिशील वातावरण में, वित्त क्षेत्र को आवश्यकताओं की पहले पहचान कर उसकी तैयारी करनी चाहिए। जैन के अनुसार, प्रौद्योगिकी वित्त सेवा उद्योग में क्रांति ला रही है और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में पीढ़ीगत बदलाव कर रही है।

जैसे-जैसे तकनीकी कंपनियों ने वित्तीय क्षेत्र में प्रवेश किया है, बैंकिंग सेवाओं को प्लेटफार्मों पर जोड़ा जा रहा है और मोबाइल के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को सीधे उनके मोबाइल फोन से बैंकिंग, पूंजी बाजार, बीमा और पेंशन के साथ-साथ गैर-वित्तीय क्षेत्र की सेवाएं मिल रही हैं।

जैन ने कहा, ‘परिणामस्वरूप कई बार यह नियामकीय परिधि और अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को धुंधला कर देता है।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस प्रौद्योगिकी क्रांति ने निश्चित रूप से वित्तीय संस्थाओं की दक्षता में वृद्धि की है और इसके परिणामस्वरूप बैंकों के साथ कामकाज करने में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। साथ ही इसने नई चुनौतियां भी पेश की हैं।’

जैन ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सलाह दी कि वे प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए सहयोग करें और लागत का अनुकूलन करने, राजस्व को अधिकतम करने और ग्राहक अनुभव को बढ़ाने के लिए साझा लाभ प्राप्त करें। साथ ही उन्होंने कहा कि हालांकि, ऐसा करते समय उन्हें डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के साथ-साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करना और उन्हें अनुचित व्यवहार से बचाना सुनिश्चित करना चाहिए।

जैसा कि डेटा को नए बहुमूल्य वस्तु के रूप में देखा जा रहा है, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को डेटा का उपयोग करने के लिए, उन्हें प्रौद्योगिकी, विश्लेषण और मानव संसाधन में क्षमता का निर्माण करना होगा।

Keyword: तकनीकी बदलाव, बैंक,


























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